राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा एक जून से शुरू कराए गए मतदाता सूची संशोधन अभियान को पहले ही दिन झटका लगा। घर-घर जाकर मतदाता सूची संशोधन में लगाई गईं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां सर्वे के बजाए प्रदर्शन करतीं नजर आईं। कड़ी धूप में प्रदर्शन के बाद सीएम को संबोधित 11 सूत्री मांगपत्र एडीएम को सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने खुद को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।
हरे रंग की पोशाक में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का जत्था दोपहर को नारे लगाता हुआ कचहरी पहुंचा। यहां डीएम कार्यालय के बरामदे में कुछ देर धरना दिया। बाद में एडीएम डीएस पांडेय को ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, मिनी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई।
यह दर्जा मिलने तक 10 से 15 हजार रुपये का मानदेय मांगा गया। मुख्य सेविकाओं के रिक्त पदों पर पदोन्नति, केंद्रों पर आपूर्ति होने वाले पोषाहार में बदलाव, मई व जून में पोषाहार प्रति दिन के बजाए सप्ताह में वितरण कराने, राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अलावा अन्य काम न लेने, सेवा काल में मृत्यु पर 5 लाख का मुआवजा आदि की भी मांग की गई है।
प्रदर्शन की अगुवाई उत्तर प्रदेश राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष नीलम वर्मा और महामंत्री रजनी मरजीना ने की। अर्चना सिंह, सुषमा, शोभा श्रीवास्तव, किरन सेठी, उमा सिंह अर्चना वर्मा, कविता, सीमा, माधुरी, संगीता सिंह, संगीता गुप्ता, इंद्राणी, माया, अंजुम, मधु गुप्ता, सोमवती, मोनिका राकेश श्रीवास्तव आदि शामिल रहीं।
बता दें कि निर्वाचन आयोग ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बीएलओ के रूप में निर्वाचन कार्य से संबद्ध किया है। पहली जून से 13 जुलाई तक मतदाता सूची संशोधन अभियान शुरू हुआ है। इसमेें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की ड्यूटी लगी है। अभियान के पहले ही दिन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने ड्यूटी के बजाय प्रदर्शन किया।
इस बारे में कार्यकत्रियों का कहना था कि प्रदर्शन की लिखित सूचना उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दे दी थी। वहीं अपर जिलाधिकारी का कहना है कि निर्वाचन ड्यूटी अनिवार्य सेवाओें में शामिल है। इससे गैरहाजिर रहने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।