बांदा। नगर पालिका के 600 सफाई कर्मचारियों की फौज मौज काट रही है, जबकि शहर के प्रमुख नाले और नालियां गंदगी से पटे पड़े हैं। पाॅलिथीन के कचरे से जल निकासी नहीं हो पाती। नालों की सफाई में लाखों रुपये हर माह खर्च होते हैं पर इनकी गंदगी नहीं दूर हो पा रही है। गर्मी के मौसम में गंदगी के चलते लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
नगर पालिका बांदा 31 वार्डों में बंटा है। नाला सफाई हो या वार्डों की सफाई सभी के लिए करीब 650 सफाई कर्मियों की फौज तैनात हैं। इनमें 76 स्थायी सफाई कर्मी हैं। 193 संविदा और 400 आउट सोर्सिंग सफाई कर्मी शामिल हैं। इसके बावजूद वार्डों व नाले-नालियों की गंदगी नहीं दूर हो पा रही है। शहर में पंकज व निम्नी दो प्रमुख नाला हैं, इनके जरिये सभी 31 वार्डों के घरों व वर्षा का पानी नदी में गिरता है। नालों की सफाई में सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण है।
यहां छोटी बाजार, बन्योटा, खुटला, सेढ़ू तलैया, स्वराज काॅलोनी व डीएम काॅलोनी, बंगालीपुरा आदि वार्डों में ज्यादातर नालों को पाटकर चबूतरे या मकान बना लिए गए हैं। नगर पालिका के सफाई कर्मचारी नाला साफ करने जाते हैं तो अपनी जान जोखिम में डालते हैं। इसके बाद भी पूरे नाले की सफाई नहीं कर पाते हैं।
इन वार्डों में नगरवासियों को ज्यादा दिक्कतें
शहर के 31 वार्डों में 10 वार्ड ऐसे हैं, जहां गंदगी से पटे खुले नाले समस्या बने हैं। इनमें सेढ़ू तलैया, कुशवाहानगर, सर्वोदयनगर, इंदिरानगर, छोटी बाजार, बन्योटा, खुटला, स्वराज काॅलोनी, जरैली कोठी, झील का पुरवा, खाईंपार वार्ड शामिल हैं। नगर पालिका नालों की सफाई को लेकर नियमित अभियान चलाने का दावा करती है पर हकीकत में यह साफ नहीं होते।
वर्जन-
-नगर पालिका क्षेत्र में नाला-नालियों की सफाई के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस समय मंडी के पीछे नहरिया की सफाई कराई जा रही है। अतिक्रमण के चलते नालों की सफाई में समस्या आती हैं।
- हेमंत प्रसाद, वरिष्ठ सफाई निरीक्षक, नगर पालिका, बांदा