बांदा। लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने गजब कारनामा किया है। एक ही मार्ग का तीन साल में तीन बार चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण करा दिया। इस पर करीब 40 करोड़ खर्च कर दिए। इसके बाद भी सड़क खस्ताहाल है।
जांच में प्रमुख अभियंता को अनियमितता मिली है। सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई हो सकती है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता (सड़क) ने मामले की जांच की। कहा कि मार्गों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य वास्तविक यातायात गणन पर निर्भर करता है।
मार्ग के क्रस्ट मोटाई की संरचना वर्तमान यातायात गणना तथा दस वर्षों में अनुमानित वृद्धि पर होना चाहिए। निर्माण कार्य की अवधि को सम्मिलित करते हुए न्यूनतम दस वर्ष की डिजाइन लाइफ को मार्ग के सुदृढ़ीकरण में लेना चाहिए।
इसके बावजूद प्रांतीय खंड के तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने यह कारनाम कर दिया। प्रांतीय खंड के अभिलेखों की जांच में पाया गया कि दो सड़कों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण के कार्य पांच वर्षों में तीन बार कराए गए। इनमें बांदा-बबेरू-कमासिन राजमार्ग संख्या-92 व अतर्रा से चौसड़-ओरन मार्ग शामिल हैं। बांदा-बबेरू-कमासिन राजमार्ग में किलोमीटर 0 से 36 तक वर्ष 2005-06 में आठ करोड़ 77 लाख रुपये खर्च कर चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कराया गया। वहीं वर्ष 2007-8 में भी किलोमीटर 2 से 38 तक राज्य सड़क निधि से 12 करोड़ रुपये खर्च किए गए और सुदृढ़ीकरण कराया गया।
इसके बाद वर्ष 2009-10 में भी इसी मार्ग पर किलोमीटर दो से 36 तक राज्य सड़क निधि से 18 करोड़ तीन लाख रुपये खर्च कर सड़क बनवाई गई। वहीं अतर्रा-चौसड़-ओरन मार्ग में किलोमीटर एक से 19 तक में वर्ष 2005-06 में बुंदेलखंड पैकेज से सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया गया।
इसमें 2.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बाद वर्ष 2009-10 में इसी मार्ग पर किलोमीटर एक से लेकर 17 तक राज्य सड़क निधि से 10.92 करोड़ रुपये खर्च कर सुदृढ़ीकरण कार्य कराया गया। इसमें अनियमितता मिली है।