चूल्हा दिखाती मृतक की पत्नी मुन्नी।
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बड़ोखर बुजुर्ग। अक्सर नत्थू को खाना परोसने वाले पड़ोसियों को उसकी भूखे हालत मेें मौत का काफी मलाल है। पड़ोस में शोक छाया हुआ है। पड़ोसी धनराज ने बताया कि अक्सर नत्थू उनसे या किसी और पड़ोसी से राशन ले लेता था। एक अन्य पड़ोसी देवी चरण ने बताया कि यह अब पता चला है कि नत्थू के घर का चूल्हा चार दिनों से नहीं जला, वरना कुछ न कुछ जरूर मदद की जाती।
मृतक की दो पुत्रियां और चार पुत्र हैं। सबसे बड़ा पुत्र 17 वर्षीय दिलीप है।
दूसरे नंबर पर 16 वर्षीय पुत्री गुड़िया है। नत्थू को इसकी शादी की भी फिक्र सता रही थी। अन्य बच्चों में 13 वर्षीय पुत्री सुधा, 10 वर्षीय पुत्र संजय, 6 वर्षीय पुत्र नितीश है। पत्नी मुन्नी ने बताया कि न तो खेती की भूमि है न रहने के लिए खुद का मकान। इस मकान में बसर कर रही है। वह उसके रिश्तेदारों ने रहने के लिए दे रखा है। मुन्नी और पुत्री गुड़िया ने बुझे पड़े चूल्हे और घर के खाली पड़े बर्तन दिखाए। मुन्नी ने बताया कि 10 हजार रुपये का कर्ज भी है। यह उसने छह माह पहले समूह से लिया था।
ग्राम प्रधान विजय बहादुर ने बताया कि नत्थू के नाम जाब कार्ड बना हुआ था लेकिन उसने मजदूरी नहीं की। अंतिम संस्कार के लिए प्रधान ने एक हजार रुपये का चेक मृतक की विधवा को सौंपा। मूंगुस पुरवा की आबादी लगभग एक हजार है। यहां 148 बीपीएल और 90 अंत्योदय तथा 480 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्ड हैं।