Alam, placenta and tajiya procession
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बांदा। मोहर्रम की 7वीं परंपरागत रस्म रिवाजों और आयोजनों के बीच मनाई गई। सुबह ताजियों के मिलाप से लेकर देर शाम अलम जुलूसाें की धूम रही। नवाबी जामा मस्जिद के सामने अलम और नाल सवारियों के जुलूसों का मेला रहा। भारी तादाद में दर्शक उपस्थित थे। इनमें हिंदू-मुस्लिम सभी शामिल हैं। जगह-जगह लंगर हुए।
मोहर्रम के 10 दिवसीय आयोजन अब तेज हो गए हैं। शनिवार को 7वीं मनाई गई। तीन दिनों से रोजाना सुबह कोतवाली के सामने हो रहे ताजिया मिलापों की श्रृंखला में शनिवार को ताजियों का मिलाप हुआ। बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों का जमघट रहा। दोपहर को मर्दननाका, निम्नीपार, खुटला, अलीगंज, क्योटरा आदि इमामबाड़ों से अलम जुलूस उठे। तीसरे पहर शहर के आधा सैकड़ा ज्यादा इमामबाड़ों से नाल सवारी के जुलूस रवाना हुए।
ढोल ताशे की गूंज शहर के अधिकांश इलाकों में गूंजती रही। यह सभी नाल सवारी और अलम नवाबी जामा मस्जिद के सामने पहुंचे। जिला पंचायत चौराहे से अमर टाकीज चौराहा तक भारी भीड़ वाला मेला लगा रहा। डॉ.शबाना रफीक ने अपने आवास के गेट पर चाय और खिचड़ा का लंगर करवाया। कांग्रेस नेता मुमताज अली ने गोलकोठी के पास लंगर किया। और भी तमाम लोगों ने मेला स्थल व गूलरनाका, अलीगंज, मर्दननाका आदि में लंगर किए। सांप्रदायिक सौहार्द की विरासत बरकरार रखते हुए इन आयोजनों में काफी संख्या में हिंदू धर्मावलंबी भी शामिल हुए।
उधर, तीसरे पहर पूर्वी कोठी से शिया मुस्लिमों का अलम जुलूस रवाना हुआ। बड़ी संख्या में काले कपड़े पहने लोग मरसिया और नोहा के बीच मातम करते रहे। इनमें कई बच्चे भी थे। अलीगंज स्थित इमामबाड़े में खत्म हुआ। पूरा दिन सभी आयोजनों में पुलिस व्यवस्था चौकस रही। रविवार को 8वीं मोहर्रम पर सुबह कोतवाली के सामने मेंहदी ताजिया जुलूस का मिलाप होगा।