चित्रकूटधाम मंडल में धान खरीद बंद हुए 10 दिन बीत गए। किसान सरकारी एजेंसियों पर बेचे गए धान की कीमत पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। केंद्रों पर किसानों का 2.34 करोड़ रुपया बकाया। मंडल में 22 हजार मीट्रिक टन धान खरीद लक्ष्य के मुकाबले इस वर्ष सिर्फ 50 फीसदी की खरीद हुई है।
चित्रकूटधाम मंडल में 29 धान खरीद केंद्र खोले गए थे। इनमें विपणन शाखा के सात, पीसीएफ के पांच, यूपीएसएस के और एनसीसीएफ के चार-चार और भारतीय खाद्य निगम का एक और बांदा में विपणन शाखा के तीन तथा पीसीएफ के पांच धान क्रय केंद्र शामिल हैं।
पहली अक्तूबर से कांटा-बाट, पंखा, बोरे व दो-दो लाख रुपये उपलब्ध कराकर कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया था। शासन ने पिछले वर्ष मंडल में 22 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस वर्ष भी यही लक्ष्य तय था।
इसके मुकाबले बांदा में 11,275 और चित्रकूट में 598 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। महोबा और हमीरपुर में धान की उपज होती ही नहीं है। सरकार ने एजेंसियों को किसानों को मौके पर ही नकद भुगतान के आदेश जारी किए थे।
खरीद के शुरुआती दिनों में तो किसान भुगतान पाकर खुश हुए, पर फरवरी में धान खरीद का सिलसिला बढ़ा तो किसानों का पैसा फंस गया। विपणन शाखा, पीसीएफ व यूपी एग्रो ने बकाया भुगतान अदा कर दिया, लेकिन एनसीसीएफ में किसानों का अभी 1.97 करोड़ रुपया बकाया है।
इसी तरह यूपीएसएस में भी 37 लाख रुपये की देनदारी है। सहालग के सीजन में बहुत से किसानों के घर में शादी-ब्याह के लिए पैसों की जरूरत है। ऐसे में वह एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। एनसीसीएफ के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही किसानों का भुगतान किया जाएगा।