बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाने
वाले रास्ते में सबसे बड़े रोड़ा बन रहे खनिज व्यवसायी और सहकारिता चेयरमैन
प्रकाश द्विवेदी को बैकफुट पर लाने के लिए सपा दिग्गजों को मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव का सहारा लेना पड़ा।
प्रकाश ने भी सीएम से सीधे रूबरू
होने का मौका नहीं छोड़ा। करीब 40 मिनट की बातचीत के बाद प्रकाश द्विवेदी
चुनावी मैदान से हटने को राजी हो गए।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव
में वोट के बदले भरपूर नोट की परंपरा कई चुनावों से चल रही है। अबकी भी यही
चल रहा है। माली हैसियत मेें सबसे मजबूत प्रकाश द्विवेदी के चुनाव में
कूदने से सपाई दिग्गजों की नींद उड़ गई।
ये जानते थे कि प्रकाश के
आगे उनका पावर और पैसा शायद सदस्यों पर कारगर न हो। ऐसे में प्रकाश का
पर्चा वापस कराने के लिए सपा नेता कई दिनों से जुटे थे।
नाम वापसी
की पूर्व संध्या रविवार को पीडब्ल्यूडी डाक बंगले में देर रात तक सपा
विधायक विशंभर सिंह यादव प्रकाश द्विवेदी को मनाते रहे।
अंतत: बात
बन गई। सोमवार को तड़के सपा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद और विधायक विशंभर
सिंह यादव प्रकाश द्विवेदी को लेकर लखनऊ कूच कर गए।
उनके साथ जिला
पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए बांदा जनपद के प्रभारी बनाए गए एमएलसी
रामवृक्ष यादव भी थे। तीनों दिग्गज सपा नेता सुबह करीब 10 बजे कालीदास
मार्ग स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर प्रकाश द्विवेदी के साथ सीएम अखिलेश
यादव से मिले।
लगभग 40 मिनट बातचीत चली। अंतत: मुख्यमंत्री की बात प्रकाश मान गए और चुनाव मैदान से हटने का फैसला ले लिया।