फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फसल जलाकर आग में कूदा दंपति, मौत

Sun, 26 Apr 2015 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा बुंदेलखंड में फसल बर्बादी पर छह और किसानों की मौत हो गई। बांदा में तीन किसानों ने आत्महत्या कर ली जबकि बांदा और हमीरपुर में तीन और किसानों की सदमे से मौत हो गई। बुंदेलखंड में किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं की घटनाओं में अब तक की सबसे दर्दनाक घटना बांदा में रविवार को सामने आई। यहां वृद्ध किसान दंपत्ति ने पहले अपने मकान को आग लगाकर फूंक दिया।
विज्ञापन


फिर खलिहान में रखी फसल को आग के हवाले कर उसमें छलांग लगा दी। दोनों ही जलकर राख बन गए। खबर मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी देर रात घटनास्थल पहुंच गए। पुलिस को आग के ढेर में कंकाल हाथ लगे। यहीं पर एक अन्य किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी।

जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बबेरू तहसील और कमासिन थाना क्षेत्र के अछरील गांव में रविवार को शाम करीब 5 बजे किसान रामकृपाल यादव (60) और उसकी पत्नी लच्छी (57) ने अपने घर में आग लगा दी और बाहर से ताला बंद करके दोनों खेत चले गए।
विज्ञापन


घर में आग की लपटें उठती देख पड़ोसी रामकृपाल को सूचना देने खेत पहुंचे। वहां उसके निजी नलकूप के पास रखी फसल बुरी तरह जल रही थी। रामकृपाल और लच्छी उसमें छलांग लगा चुके थे। दोनों ही जलकर राख बन गए। ग्रामीणों ने कमासिन थाने में सूचना दी।

दरोगा निर्मल वाजपेयी तत्काल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों व पुलिस कर्मियों की मदद से आग के ढेर में रामकृपाल और उसकी पत्नी लच्छी के शव तलाशे। देर रात थानाध्यक्ष ने बताया कि बमुश्किल कंकाल बरामद हुए हैं। थानाध्यक्ष ने बताया कि गेहूं की फसल कमजोर होने से कोई रामकृपाल की फसल की मड़ाई करने को तैयार नहीं था।

इससे वह भी दबाव में था। उसके दो पुत्र हैं और दोनों अलग रहते हैं। एक बबेरू में और दूसरा कहीं बाहर है। पुत्रों से भी उसे सहयोग नहीं मिलता था। गांव के लेखपाल श्यामलाल ने बताया कि मृतक रामकृपाल के नाम 10 बीघा और पत्नी लच्छी के नाम 15 बीघा जमीन है।

उधर, देर रात उप जिलाधिकारी (बबेरू) विनय पाठक और क्षेत्राधिकारी यशवीर सिंह भी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।  समाचार लिखे जाने तक दोनों बेटे मौके पर नहीं पहुंचे थे। सदर तहसील के कनवारा गांव निवासी मनीष (21) पुत्र रामऔतार ने शनिवार को शाम घर में खपरैल की धन्नी में रस्सी का फंदा बांध कर फांसी लगा ली।

घटना के समय घर के सभी लोग काम पर गए थे। वापस लौटे तो उसका शव टंगा देखा। पिता रामऔतार ने बताया कि मनीष गांव में आटा चक्की लगाकर घर चलाता था। उसी आमदनी से 20 हजार रुपये में 10 बीघा खेत ठेके पर (बलकट) लिए था। फसल मड़ाई करने पर सिर्फ 2 कुंतल गेहूं पैदा हुआ।

इसी सदमे से उसने फांसी लगा ली। ग्राम प्रधान रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ ने भी फांसी लगाने की वजह फसल खराब होने का सदमा बताया। मृतक का बड़ा भाई संतोष और मंझला भाई आशीष दिल्ली में मजदूरी करते हैं। बबेरू तहसील क्षेत्र के पतवन गांव में किसान जगजीवन राम उर्फ कल्लू वर्मा (40) की हार्ट अटैक से मौत हो गई।

पिता बाबूलाल ने बताया कि उसके नाम 5 बीघा जमीन है। पुत्र कल्लू 10 बीघा खेत बलकट (ठेके पर) लिए था। फसल तबाह होने और दो पुत्रियों की शादी की चिंता के सदमे से उसे शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ा। जिला अस्पताल से उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। शनिवार की शाम कानपुर में उसकी मौत हो गई।

उधर, हमीरपुर में मौदहा के सिसोलर थानाक्षेत्र के टोला गांव निवासी किसान जालिम (62) पुत्र शिवबालक निषाद और  सुमेरपुर क स्बे के इमिलिया थोक निवासी दयाराम की पुत्री ममता (40) की सदमे से मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें