बांदा। ग्राम पंचायतों में सामने आए घोटाले की जांच तेज हो गई है। इस मामले में डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत भुगतान प्रक्रिया देखने वाले डीपीएम वंश बहादुर बिंद के खिलाफ जल्द प्राथमिकी दर्ज होने संभावना प्रबल हो गई है।
पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने संकेत दिए हैं कि जांच में आरोपों की पुष्टि हो रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई 26 लाख रुपये के संदिग्ध भुगतान प्रकरण से जुड़ी है, जो डीडी पंचायत परवेज आलम खां की अनुमति के बिना आइडी-पासवर्ड से मार्च माह में किया गया था। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि डीपीआरओ कार्यालय की महिला कर्मचारियों के डीडी पंचायत पर लगाए आरोपों की कोई पुलिस जांच नहीं चल रही है, यह विभागीय मामला है। पहले ही बबेरू ग्रामीण ग्राम पंचायत के गबन में सचिव अरविंद कुमार निलंबित हो चुके हैं, जबकि सलाहकार अभियंता अनिल सिंह की सेवा समाप्ति जारी होने के साथ-साथ बबेरू बीडीओ गरिमा अग्रवाल को हटाने की कार्रवाई हुई है। अब जांच का दायरा विभाग के उच्च स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। इधर, डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि निदेशालय के आदेश पर डीपीएम ने भुगतान किया है। जबकि डीपीएम वंश बहादुर बिंद का कहना है कि भुगतान डीडी पंचायत की अनुमति मिलने के बाद किया गया है।