रामकथा के पूर्व निकाली गई शोभायात्रा में शामिल महिला-पुरुष।
- फोटो : अमर उजाला
संसार के भवसागर को वही पार करता है, जिस पर प्रभु श्रीराम की कृपा होती है। उनकी कृपा तभी मिलती है जब भक्त उन्हें सब कुछ समर्पित कर ध्यान में लीन हो जाता है। उक्त बातें तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ में कही।
संकट मोचन मंदिर के 102वें वार्षिकोत्सव पर सोमवार से जहीर क्लब ग्राउंड में श्रीराम कथा की शुरुआत हुई। सुबह मंगल कलशयात्रा निकाली गई। बाजेगाजे और नाचते घोड़े शामिल हुए। यात्रा में पीतवस्त्र धारी महिलाओं ने मंगल गीत गाए। युवा जय श्रीराम के नारे लगाते रहे।
स्वामी रामभद्राचार्य ने मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना कराई। प्रवचन में पहले दिन उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा तो हाथों की ताली है जो बजते ही संशय रूपी पक्षियों को उड़ा देती है। राम की कथा मंगल करती है। जिसके जीवन में रामकथा होगी, उसे तो संशय हो ही नहीं सकता। कहा कि अंगद सीता की खोज में सागर पार कर लंका जाने तो तैयार हुए, लेकिन कहा कि लौटते समय संशय है।
उधर, जब हनुमान लंका जाने को तैयार हुए तो श्रापवश अपना अतुलित बल भूल गए। रामभद्राचार्य ने कहा कि सागर को वही पार कर सकता है, जिसे प्रभु श्रीराम ने कृपा रूपी अपनी मुद्रिका दे रखी है। लल्लूराम शुक्ल के संगीतमय भजन में भक्त झूमे। अजित गुप्ता, विनोद जैन, धर्मेंद्र त्रिपाठी, ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, सारंग महाराज, आशीष, अवधेश शर्मा आदि मौजूद रहे।