-स्वतंत्र गवाह नहीं बनाने और एनडीपीएस एक्ट की प्रक्रिया में कमियों पर अदालत ने दिया संदेह का लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। आंगन में गांजा उगाने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय कुमार सिंह प्रथम ने आरोपी रामायणदास पाठक को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पाया कि तलाशी और बरामदगी की प्रक्रिया में कई कमियां सामने आईं। स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया, जबकि मुखबिरी की सूचना पर वैधानिक प्रक्रिया के पालन का भी पुख्ता प्रमाण नहीं मिला।
अभियोजन के अनुसार, सात अप्रैल 2014 को बिसंडा पुलिस ने ग्राम अमवा निवासी रामायणदास पाठक के घर के आंगन से छोटे-बड़े 90 हरे पौधे बरामद करने का दावा किया था। कुल वजन करीब साढ़े छह किलो बताया। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। विचारण के दौरान अभियोजन ने चार पुलिसकर्मियों की गवाही कराई।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि तलाशी और बरामदगी के दौरान घनी आबादी में स्थित घर से किसी स्वतंत्र स्थानीय गवाह को शामिल नहीं किया गया, जबकि मौके पर आरोपी की पत्नी मौजूद थीं। बचाव पक्ष ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पौधे अपरिपक्व थे और उनमें आवश्यक फूल या कलियां नहीं थीं। बचाव पक्ष की ओर से मुन्नीलाल और रामदास को सफाई साक्षी के रूप में पेश किया गया। बरामद पौधों की तौल और 500 ग्राम नमूने को सील करने की प्रक्रिया के संबंध में भी संतोषजनक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। इन कमियों के आधार पर न्यायालय ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। अदालत ने रामायणदास पाठक को दोषमुक्त करते हुए उसके व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानतदारों को दायित्वों से मुक्त करने का आदेश दिया।