बांदा। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय सत्यवीर सिंह की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में आरोपी सोनू कुमार को दोषमुक्त कर दिया। परिवादी पंकज कुमार शुक्ला और आरोपी के बीच अदालत में समझौता होने के बाद यह फैसला सुनाया गया।
पंकज कुमार शुक्ला ने 29 नवंबर 2022 को बेटे के इलाज के लिए सोनू कुमार को 40 हजार रुपये उधार दिए थे। सोनू ने छह माह में रकम लौटाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद 15 मई 2023 को उसने 40 हजार रुपये का चेक पंकज को दिया। पंकज ने 20 मई को चेक अपने पंजाब नेशनल बैंक, बांदा के खाते में जमा किया लेकिन 26 मई को चेक अनादरित हो गया।
पंकज ने नौ जून 2023 को सोनू को पंजीकृत डाक से नोटिस भेजकर रकम लौटाने को कहा। नोटिस मिलने के बावजूद रकम नहीं लौटाई गई। इसके बाद पंकज ने अदालत में वाद दायर किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के प्रयासों से दोनों पक्षों में समझौता हो गया। दोनों ने लिखित सुलहनामा दाखिल किया। परिवादी ने अदालत में बयान दिया कि उसे सोनू से चेक में अंकित पूरी धनराशि ब्याज समेत प्राप्त हो गई है। उसने आरोपी के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई न करने की इच्छा जताई। अदालत ने आरोपी के निजी बंधपत्र और जमानत पत्र भी निरस्त कर दिए।
आठ साल पुराने दुर्घटना मामले में आरोपी बरी
बांदा। आठ साल पुराने सड़क दुर्घटना के मामले में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय सत्यवीर सिंह की अदालत ने आरोपी मूलचंद्र को बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष लगातार समन और वारंट जारी होने के बावजूद गवाहों को पेश नहीं कर सका। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में यह निर्णय सुनाया।
मामला 20 अप्रैल 2018 का है। तिंदवारी थाना क्षेत्र में मूलचंद्र पर लापरवाही से टेंपो चलाने का आरोप था। टेंपो की टक्कर खड़े ट्रक से हो गई थी। हादसे में नंदकिशोर की मौत हो गई थी जबकि कई सवारियां घायल हुई थीं। मृतक के भाई राम सिंह की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना उपनिरीक्षक शिवसागर ने की थी।
मामले में अभियुक्त ने आरोपों से इन्कार करते हुए विचारण की मांग की थी। अदालत ने पाया कि वादी राम सिंह, कमला समेत अन्य गवाहों को कई बार समन, वारंट और गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। इसके बावजूद गवाहों को पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि अभियुक्त वर्ष 2018 से लगातार अदालत में उपस्थित हो रहा था। साक्ष्य प्रस्तुत नहीं होने पर अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 258 के तहत मूलचंद्र को बरी कर दिया। (ब्यूरो)
पति को भरण-पोषण और मुआवजा का आदेश
बांदा। घरेलू हिंसा के मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन शुभांशु दास ने महिला संगीता की याचिका स्वीकार करते हुए पति लालू कबीर को भरण-पोषण और मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पत्नी को प्रतिमाह चार हजार रुपये देने और घरेलू हिंसा से हुई क्षतिपूर्ति के लिए एकमुश्त 50 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
इसके अलावा विपक्षीगण को 20 हजार रुपये का निजी बंधपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में घरेलू हिंसा न हो। संगीता ने याचिका में बताया कि उनका विवाह आठ जून 2019 को लालू कबीर से हुआ था। आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। न्यायालय ने जिला प्रोबेशन अधिकारी की आख्या और संगीता के साक्ष्य शपथपत्र के आधार पर घरेलू हिंसा के आरोपों को सही पाया। (ब्यूरो)