बांदा। पिस्टल के लाइसेंस में रिपोर्ट लगाने के नाम पर दो हजार रुपये रिश्वत लेने वाले निलंबित लेखपाल को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई है। अदालत ने सात साल से सजा कम होने पर दोषी को जमानत पर रिहा भी कर दिया। अब वह हाईकोर्ट में अपील करेगा।
भ्रष्टाचार निवारण अदालत के विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि वर्ष 2007 में हमीरपुर के कलौलीतीर निवासी अभय कुमार तिवारी ने एंटी करप्शन ऑफिस, झांसी में शिकायत की थी कि हमीरपुर के कुरारा निवासी लेखपाल दयाराम वर्मा उससे पिस्टल के लाइसेंस में रिपोर्ट लगाने के नाम पर दो हजार रुपये रिश्वत ले रहा है। इस पर झांसी की एंटी करप्शन टीम ने छापा मारकर लेखपाल को रंगे हाथों पकड़ा था।
इस पर विभाग ने आरोप पत्र तैयार कर न्यायालय में पेश किया गया था। प्रकरण में छह गवाह पेश हुए थे। अदालत ने निलंबित लेखपाल को रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाते हुए तीन साल की सजा और दो हजार रुपये जुर्माना किया है। अदालत ने दोषी लेखपाल को जमानत पर रिहा किया है।