महोखर गांव में आत्महत्या करने वाले किसान का धराशाई हुआ मकान।
- फोटो : BANDA
बांदा। डीएम के आदेश के बाद भी आत्महत्या करने वाले किसान की विधवा को प्रधानमंत्री आवास योजना से आवास नहीं मिला, जबकि आवास के लिए आवेदन किए साल भर से अधिक हो गया है। इस बार हुई बारिश में उसका खंडहरनुमा कच्चा मकान भी ढह गया। अब विधवा और उसके बच्चों को सिर छिपाने का संकट आ गया है।
मंडल मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर बड़ोखर ब्लाक के महोखर गांव में इसी साल 5 जुलाई को कर्जदार किसान महेश शुक्ला ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जाता कि वह बेटी कुमारी संध्या की कोचिंग की फीस जमा नहीं कर पाया था। इसी से क्षुब्ध होकर जान दी थी।
महेश का पुत्र राहुल शुक्ला और बेटी कुमारी संध्या बेरोजगार हैं। अब विधवा सीता बेटे के साथ मजदूरी कर रही है। किसान की आत्महत्या के बाद छपी खबरों पर कुछ दिन संगठनों और कुछ लोगों ने हमदर्दी जताई। हालांकि आर्थिक मदद सिर्फ कुछेक ने ही की।
चिराग फाउंडेशन की डॉ. शबाना रफीक और डॉ. सबीहा ने फाउंडेशन की सदस्यों के सहयोग से संध्या का दाखिल बांदा पैरामेडिकल में करा दिया है। वह नर्सिंग का कोर्स कर रही है। किसान की विधवा और बेटा गांव में ही रह रहे हैं। बारिश में मकान ढह जाने से इस परिवार के समक्ष सिर छिपाने का संकट आ खड़ा हुआ है। विधवा सीता ने बताया कि वर्ष 2016-17 में पीएम आवास योजना में आनलाइन आवेदन किया था। हार्ड कापी में डीएम हीरालाल ने निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक आवास नहीं मिला।
अधिकारी को पता नहीं, सचिव से पूछेंगे
आत्महत्या करने वाले गरीब किसान की विधवा को आवेदन के एक वर्ष बाद भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिलने की बाबत जिला परियोजना अधिकारी (डीआरडीए) आरपी मिश्रा का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। गांव के सचिव से पता करेंगे।