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बुंदेलखंड के लिए हीरा परियोजना है अभिशाप

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बांदा। लाखों पेड़-पौधों से हरे-भरे बुंदेलखंड के बक्सवाहा जंगल को हीरा खदान के लिए उजाड़ देने की सरकारी योजना का विरोध जारी है। न सिर्फ यूपी-एमपी स्थित बुंदेलखंड, बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से पर्यावरण प्रेमी जंगल बचाने की मुहिम में कूद पड़े हैं। कहा कि 2.15 लाख पेड़-पौधे काटने की यह परियोजना बुंदेलखंड के लिए अभिशाप है।
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सोमवार को पर्यावरण प्रेमियों ने इसी मुद्दे पर वेबिनार के माध्यम से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। दलील दी कि इस जंगल के पेड़ कटने से बुंदेलखंड में जैव विविधता और ईको सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचेगा। यहां बड़ी संख्या में तेंदुआ, भालू, बारहसिंगा, हिरण आदि वन्य जीव और मोर व गिद्ध जैसे दुर्लभ पक्षी हैं। यह भी खत्म हो जाएंगे। अध्यक्षता कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि एमपी सरकार हीरों के चक्कर में बुंदेलखंड का एक बड़ा हरा-भरा जंगल नेस्तनाबूत करने की कोशिश में है। आठ साल पहले भी यह कोशिश हुई थी, लेकिन ग्रामीणों ने यहां खुदाई करने वाली कंपनी को खदेड़ दिया था। पर्यावरण प्रेमी आशिक मंसूरी ने कहा कि जंगल कटने से छह गांव प्रत्यक्ष रूप से और 13 गांव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे।
यहां आबाद 25 हजार लोगों का जीवन प्रभावित होगा। सरकार ने बिड़ला ग्रुप को यह काम सौंपा है। इसका पुरजोर विरोध होगा। वेबिनार का संचालन कर रहे प्रयागराज के शोध छात्र और बुंदेलखंड निवासी रामबाबू तिवारी ने बक्सवाहा जंगल हीरा परियोजना बुंदेलखंड के लिए अभिशाप है। इसका हर स्थिति में विरोध किया जाएगा। चिपको आंदोलन की तर्ज पर पर्यावरण प्रेमी जंगल में धरना देकर पेड़ बचाएंगे। वेबिनार में संतोष दमेले, करुणा रघुवंशी, नंदकिशोर प्रजापति, परशुराम तिवारी, प्रो. पुष्पा पटेल, रजनीश अवस्थी, विनोद जैन, केदार सैनी, प्रिया सिंह, भारत रैकवार, स्मृति शुक्ला, अशफाक सिद्दीकी, साहिल कुरैशी आदि शामिल रहे।
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