अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। दो मासूम बेटों को खोने के बाद मां कलावती का रो-रोकर बुरा हाल है। कभी वह दोनों बेटों को पुकारकर दहाड़ें मारने लगती है तो कभी अचानक बेसुध होकर गिर पड़ती है।
होश में आती है तो आंखों के सामने बेटों के चेहरे घूम जाते हैं और फिर चीखकर पूछती है कि बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था...। उसके इस सवाल का जवाब देने के लिए आसपास मौजूद लोगों के पास भी शब्द नहीं हैं।
गांव नंदवारा में दो सगे भाइयों मौत के मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। कलावती की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। जिस घर में दोनों बेटे खेलते-कूदते थे, वहां अब मातम पसरा है। कभी वह बेटों को याद कर बिलखती है तो कभी उन्हें पुकारते हुए दरवाजे की ओर देखने लगती है।