मामला वर्ष 2014-15 का है, जिले के मर्का थाना क्षेत्र के ग्राम मऊ निवासी संगीता देवी अपने 6 वर्षीय किशन के साथ कामदगिरी की परिक्रमा करने गई थी। तभी भीड़ के बीच वह अचानक किशन गायब हो गया। परिवार ने महीनों किशन की खोजबीन की पर कोई सुराग नहीं मिला। मामला ठंडा पड़ गया, लेकिन किस्मत ने एक दिन करवट ली।
बीते जुलाई माह में मटौंध-महोबा रेलवे लाइन के किनारे एक ट्रैकमैन ने किशोर को अकेले, भयभीत और भटके हुए देखा। उसने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी। पीआरवी ने बच्चे को सुरक्षित कर चाइल्ड हेल्पलाइन महोबा भेजा। काउंसलिंग के दौरान जब किशोर ने अपना नाम किशन और वह बांदा जिले का रहने का जिक्र किया, तब पुलिस ने उसकी असली पहचान तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाया।
बंधुआ मजदूरी और प्रताड़ना की दर्दनाक कहानी
अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि जांच के दौरान जो सच सामने आया, वह व्यवस्था को झकझोर देने वाला था। कामदगिरी से गायब होने के बाद मासूम को जौरही गांव के राजेश कुशवाहा अपने साथ घर ले गया और वर्षों तक बंधुआ मजदूरी कराता रहा। बाद में उसने बच्चे को सबल सिंह को बेच दिया। सबल ने फिर उसे संजय सिंह को बेच दिया। संजय ने उसे आगे मटौंध क्षेत्र के भुरेड़ी निवासी देवेंद्र सिंह के हाथों दे दिया, जहां वह प्रताड़ना और मजबूरन मजदूरी सहने को विवश रहा। इन सब जगहों पर किशन को अलग-अलग तरह से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
वर्षों तक वह एक अदृश्य कैदी की तरह जिंदगी काटता रहा। अंततः एक दिन मौका पाकर वह वहां से भाग निकला और रेलवे ट्रैक के सहारे आगे बढ़ता रहा। यही उसका जीवन बचाने वाला मोड़ साबित हुआ। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 जुलाई 2025 को कुल 7 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की। किशोर को ललितपुर बाल संरक्षण गृह में सुरक्षित रखा गया। अक्टूबर माह में देहात कोतवाली क्षेत्र के जैरही निवासी राजेश कुशवाहा, सबल सिंह, संजय सिंह व मटौंध थाना क्षेत्र के भुरेड़ी निवासी देवेंद्र सिंह को दोषी मानते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।