बांदा। गर्मी में पारा चढ़ रहा है और पानी की किल्लत के साथ-साथ दूध की भी कमी हो रही है। ऐसे में दूध में मिलावट की मंडी भी गर्म होने लगी है। दूध को खराब होने से बचाने के लिए उसमें जानलेवा पदार्थों की मिलावट का खेल चल रहा है। शहरवासियों को सप्लाई किया जाने वाला काफी दूध इसी तिकड़म से बचाकर ‘सुरक्षित’ पहुंचाया जा रहा है। दूसरी ओर अफसरों का कहना है कि अक्सर दूध के नमूने लिए जाते हैं और मिलावट पाए जाने पर दोषी दूधियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
बीमारियों को न्योता देने वाले गर्मी भरे मौसम में जनजीवन से दूधिए भी खिलवाड़ कर रहे हैं। दूध की मारामारी के बीच आसमान छूते भावों के बाद भी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। मिलावट का धंधा जोरों पर है।
शहर के मध्य स्थित रामलीला मैदान में रोजाना सैकड़ों की तादाद में दूधियों का जमघट रहता है। दूधिए खुद बताते हैं कि बांदा शहर में प्रतिदिन तकरीबन एक लाख लीटर दूध की खपत है। आसपास के गांवों से दूधिए दूध निकलवाकर लोहे के डिब्बों में भरकर शहर लाते हैं। सूत्र बताते हैं कि इनमें अधिकांश दूध मिलावटी है। सोडा और वाशिंग पाउडर आदि की मिलावट कर उन्हें ‘सुरक्षित’ लाने की मशक्कत दूधिए करते हैं। कई दूधियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी यह मजबूरी भी है क्योंकि यह तिकड़म वे न करें तो दूध फट जाता है और उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ता है। कुछ तो यह भी बताते हैं कि दूध खराब होने से रोकने के लिए यूरिया खाद की मिलावट की जा रही है।
उधर, खाद्य निरीक्षक का कहना है कि दूध के नमूने लेने का काम लगातार चलता है। मिलावट पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।