बांदा। भगवान राम की तपोस्थली में स्थित पाठा पुलिस कर्मियों को पसंद नहीं। रामचंद्र ने जहां 14 वर्ष जंगलों में गुजारे वहीं ज्यादातर खाकी वर्दी वाले थानों में दो-चार साल भी बिताने को तैयार नहीं। यही वजह है कि चित्रकूट जनपद में तैनात 50 फीसदी पुलिस कमियों ने अपने तबादले की अर्जी दे दी है। डीआईजी ने फिलहाल 44 का तबादला कर दिया है। उनका कहना है कि अर्जियां मान लीं तो तीर्थक्षेत्र में सिपाहियों का टोटा हो जाएगा। गौरतलब है कि सरकार के फरमान के बाद चित्रकूटधाम मंडल में 438 पुलिसकर्मियों को पुन: उनकी पसंदीदा और गृह जनपद से जुडे़ जिलों मेें तैनाती दे दी गई है।
बसपा सरकार में गृह जनपद की सीमाओं से जुडे़ जिलों में तैनात पुलिस कर्मियों का दूर जिलों में तबादला कर दिया था। चित्रकूटधाम मंडल में इसके तहत 438 पुलिस कर्मियों का स्थानांतरण हुआ था। बांदा, महोबा और हमीरपुर के अधिकांश पुलिसकर्मी चित्रकूट जनपद भेजे गए थे। अब सपा सरकार ने बसपा सरकार के उस फरमान को खारिज कर दिया है। इससे पुलिस कर्मियों के फिर अपने पुराने जनपदों में लौटने का रास्ता साफ हो गया है। नतीजे में चित्रकूट जनपद में बेचैनी से दिन गुजार रहे पुलिस कर्मियों में वहां से हटने की होड़ मच गई है। मंडल के पुलिस उप महानिरीक्षक पीके श्रीवास्तव बताते हैं कि चित्रकूट जनपद में 495 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें 250 ने अपने तबादले की अर्जी दी है। इनमें सिपाही और हेड कांस्टेबिल शामिल हैं। इसके अलावा कई पुलिस कर्मियों ने तबादले के लिए अपना आवेदन पुलिस हेड क्वार्टर इलाहाबाद भेजा है। डीआईजी का कहना है कि चित्रकूट में इतनी बड़ी संख्या में तबादले कर दिए गए तो वहां फोर्स का संकट पैदा हो जाएगा। फिलहाल वरिष्ठता के आधार पर सिर्फ 44 सिपाहियों का तबादला किया गया है। सभी अर्जियों पर तबादले की कार्रवाई कर दी गई तो चित्रकूट में पुलिस बल का भारी टोटा हो जाएगा।