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प्लेटफार्म पर इंतजार मजबूरी

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बांदा। रेलवे को हर माह सवा करोड़ रुपए से ज्यादा अदा करने वाले रेल यात्रियों को प्लेटफार्म पर बैठने के लिए साफ-सुथरा फर्नीचर भी नहीं मयस्सर। अधिकांश यात्रियों को धूलभरी फर्श पर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है। आवारा जानवर भी उनके साथ दिन-रात नजर आते हैं। हालांकि अफसरों का कहना है कि स्टेशन के सुंदरीकरण के बाद नई बेंच लगाई जाएंगी।
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बांदा रेलवे स्टेशन को ‘ए’ श्रेणी का दर्जा काफी पहले दिया जा चुका है। सुविधाएं तो बढ़ीं लेकिन नाम मात्र को। आवारा मवेशियों के बीच गंदी जमीन पर बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना यात्रियों की रोजमर्रा की मजबूरी है। बड़ी तादाद में प्रतीक्षारत यात्री प्लेटफार्म की धरती पर सो भी जाते हैं। गाय, कुत्ता आदि आवारा जानवर उनके इर्दगिर्द मंडराते हैं। यहां पर रोजाना तकरीबन 10 हजार यात्रियों की आमदरफ्त है लेकिन यात्रियों को सुविधाएं न के बराबर हैं। दो नंबर प्लेटफार्म में पानी तक भी नहीं मिलता।
उधर, इस बारे में स्टेशन प्रबंधक पीके सिंह का कहना है कि यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। प्लेटफार्म का उच्चीकरण हो रहा है। इसके बाद सीटें लगेंगी। उन्होंने बताया कि स्टील की 40 बेंच आ गई हैं। सुदृढ़ीकरण के बाद इन्हें लगाया जाएगा। द्वितीय श्रेणी प्रतीक्षालय में भी कुर्सियां लगेंगी। दो नंबर प्लेटफार्म के बारे में स्टेशन प्रबंधक का कहना था कि स्टाफ की कमी से वहां टिकट घर शुरू नहीं हो पा रहा है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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