बांदा। विश्वविख्यात मदरसा जामिया अरबिया हथौरा में सोमवार को एक बड़ा झटका और सदमा लगा। इस मदरसे के प्रबंधक और बुजुर्ग आलिम मौलाना नफीस अकबर साहब का इंतकाल हो गया। वह लगभग 86 वर्ष के थे। देर शाम मदरसा परिसर में उनकी नमाजे जनाजा और तदफीन (अंतिम संस्कार) में भारी हुजूम उमड़ पड़ा। नमाजे जनाजा उनके बड़े बेटे मौलाना तलहा ने अदा कराई। पूरे प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड से लोग शामिल हुए।
मौलाना नफीस अकबर मूल रूप से फतेहपुर जनपद के रहने वाले थे। 16 वर्ष की उम्र में ही वह मदरसा हथौरा आ गए। मदरसा संस्थापक कारी मौलाना सिद्दीक अहमद की सरपरस्ती में मदरसा में तालीम हासिल की। बाद में वह इसी मदरसे के प्रबंधक और शेखुल हदीस बने। यह इस्लामी डिग्री है। उनके पढ़ाए हुए लाखों तलब देश और विदेश में मदरसों में पढ़ा रहे हैं। रविवार को तड़के करीब 4 बजे मदरसा परिसर स्थित कालोनी में अपने आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। खबर फैलते ही पूरे देश से लोगों के हथौरा आने का सिलसिला शुरु हो गया। शाम को सूरज ढलने के बाद मगरिब की नमाज के बाद उनकी नमाजे जनाजा मररसा परिसर के ग्राउंड में हुई। लगभग एक लाख लोग इसमें शरीक हुए। प्रदेश के कृषि मंत्री राजीव कुमार सिंह भी मदरसा पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। उनके साथ सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी और कई सपा नेता भी थे। देर शाम भारी हुजूम ने उनको मदरसा के नजदीक स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक कर दिया। मदरसा संचालक मौलाना कारी हबीब अहमद भी पूरे समय मौजूद रहे।