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फूड प्वाइजनिंग के मरीज पस्त

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अतर्रा। मैरिज हाल में तिलक समारोह के दौरान विषाक्त भोजन खाने से बीमार हुए लोग पस्त हैं और अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। चंद पैसों के लालच में दुकानदार और हलवाई ने सैकड़ों लोगों का जीवन दांव पर लगा दिया। इतनी बड़ी घटना के बाद प्रशासन ने दुकान से खोवा तो जब्त कर नहर में फेंकवा दिया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर हाथ खड़े कर लिए।
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कटरा बाजार निवासी अंशुल गुप्ता का लखन कालोनी गेस्ट हाउस में गुरुवार को तिलक था। दूषित मिठाई खाने से करीब सवा सौ लोग बीमार पड़ गए थे। पेट में ऐंठन, उल्टी-दस्त पर उन्हें आनन-फानन अस्पतालों में दाखिल कराया गया। सीएचसी में इतनी बड़ी संख्या में भर्ती मरीजों को बेड तक नसीब नहीं हुए। ज्यादातर ने जमीन पर लेटकर बोतल चढ़वाई। तीसरे दिन भी करीब 50 से ज्यादा लोग अभी इलाज करा रहे हैं। घटना के बाद हलवाई अपना सामान छोड़कर भाग खड़ा हुआ। उधर, परिजनों का कहना है कि हलवाई और दुकानदार ने अधिक कमाई के चक्कर में सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल दी। प्रशासन व खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने महज खोवा जब्त कराने तक ही अपनी कार्रवाई सीमित रखी। जबकि दुकान में इस सबके बावजूद नकली खोवा की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। अधिवक्ता राजेश द्विवेदी, चंद्रभान दीक्षित, ब्रह्मदत्त शुक्ला आदि बुद्धिजीवियों का कहना है कि दूध से निर्मित खोवा व पनीर की बिक्री पर रोक लगाना चाहिए।

नमूने फेल हुए तो होगी कार्रवाई
बांदा। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी चितरंजन कुमार ने बताया कि दुकानदार के यहां 11 सैंपल भरे गए हैं। 60 किलो दूषित खोवा नष्ट कराया गया है। 25 दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। नमूने फेल मिले तो एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, उप जिलाधिकारी अतर्रा वैभव मिश्रा ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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