बांदा। धनतेरस पर गणेश-लक्ष्मी को प्रसन्न को शगुन के लिए अबकी ‘अमेरिकी डालर’ का विकल्प भी मौजूद है। चांदी के सिक्कों के अलावा इन्हें भी खरीदा जा सकता है।
सर्राफा व्यापारियों के शोरूम में चमचमाते चांदी के नोट नजर आ रहे हैं। सिक्कों पर गणेश-लक्ष्मी की आकृतियां हैं। साथ ही डालर के रूप में चांदी की करेंसी भी खरीदारों को आकर्षित करेगी। चांदी के इस डालर में ‘यूनाइटेड स्टेट आफ अमेरिका’ लिखा गया है। जार्ज पंचम का चित्र उकेरा गया है। सर्राफा व्यवसायियों का कहना है कि सोना महंगा बहुत है। ज्यादातर लोग चांदी खरीद कर धनतेरस का शगुन और शौक पूरा करते हैं। सर्राफा दुकानदारों का दावा है कि यह डालर 99.99 प्रतिशत शुद्ध चांदी का है। 20 डालर वाले डालर का वजन 20 ग्राम है। कीमत 1080 रुपये है। इसी तरह 100 ग्राम तक के चांदी के डालर ग्राहकों को परोसे जा रहे हैं। सर्राफ इंद्रेश जड़िया, सुनील गुप्ता, मनु गोयल, संदीप अग्रवाल ने बताया पुराना सिक्का 1000 रुपये का है। महंगाई के साथ मजदूरी भी बढ़ी है। 20 ग्राम वाले डालर या नोट की बनवाई पिछले वर्ष 40 रुपये थी। अबकी यह 80 है। 50 ग्राम वाले डालर की बनवाई 150 और 100 ग्राम चांदी के नोट की मजदूरी 200 रुपये है।
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कल से शुरू हो जाएगा पांच दिनी दीवाली पर्व
बांदा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी शनिवार से पांच दिनी पर्व या यम पंचक की शुरुआत होगी। धनतेरस से लेकर भइया द्वीज तक पांच पर्वों का उत्साह रहेगा। पहली नवंबर को धनतेरस या धन त्रयोदशी पर यम की प्रसन्नता के लिए घर के द्वार पर निशामुख दीप दान किया जाएगा। इसी दिन तीन दिनी गोत्रि रात्रि व्रत और लक्ष्मी उपासना शुरू होगी। बर्तनों व आभूषणों सहित मूल्यवान धातुओं की खरीद की जाएगी। आरोग्य सबसे बड़ा धन है। भगवान धनवंतरि पूजे जाएंगे। दो नवंबर को नरक चतुर्दशी पर यम की प्रसन्नता के लिए अन्न के ढेर और घर दीपकों की रोशनी से जगमग होंगे। छोटी दीपावली पर वंश वृद्धि और आयुष्य तथा मंगल कामना के लिए भीष्म के निमित्त तर्पण के साथ हनुमान की पूजा की जाएगी। रात में लक्ष्मी-गणेश का आह्वान कर पूजा स्थल पर आसन दिया जाएगा। तीन नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। घर-आंगन दीपकों और बिजली की रंगीन रोशनी से जगमग होगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा चार नवंबर को गोवर्धन और अन्न कूट पूजन होगा। पांच नवंबर को भैया दूज मनाया जाएगा। यम द्वितीया पर दोपहर में यम तर्पण, यमुना स्नान किया जाएगा। कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त और कलम दवात का पूजन करेंगे। ब्यूरो
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प्रदोष काल में पूजन शुभ
रविवार को दीपावली में प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश, इंद्र व कुबेर की पूजा की जाएगी। ज्योतिषाचार्य उमाकांत त्रिवेदी (कटरा) के मुताबिक 3 नवंबर को शाम 6:40 बजे तक अमावस्या समाप्त हो जाएगी। प्रदोष काल पूजन का सबसे सर्वोत्तम मुहूर्त होगा। घरों में स्थिर वृष लगनस्थ पूजन मुहूर्त शाम 5:56 से 7:53 बजे और औद्योगिक प्रतिष्ठानों सहित तांत्रिक उपासना के लिए स्थिर सिंह लग्न का मुहूर्त रात 12:24 से 2:39 बजे तक है। साधक आधी रात में महाकाली की पूजा करेंगे। इसी के साथ तीन दिनी गोत्रि रात्रि व्रत पूरा होगा।