बांदा। लगभग 16 वर्षों पूर्व हुई जल निगम अधिशासी अभियंता की चर्चित हत्या के मामले में नामजद पांचों आरोपियों को सुबूतों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया।
यहां रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म में 5 फरवरी 1998 को जल निगम यांत्रिक शाखा के तत्कालीन अधिशासी अभियंता 42 वर्षीय प्रेम सिंह का शव पुलिस ने बरामद किया था। इस मामले में पुलिस ने मृतक अभियंता के घर में काम करने वाली महिला फूला देवी से कड़ाई से पूछताछ की थी। घटना के पीछे विभाग में हुए लगभग 50 लाख रुपये के घपले को लेकर दो अधिशासी अभियंताओं के बीच चल रहा विवाद बताया गया था। हालांकि घपले की कोई जांच ही नहीं हुई। पहले इस केस की तफ्तीश राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को दी गई। बाद में विवेचना सिविल पुलिस को सौंप दी गई। तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बलवंत राय और कोतवाली प्रभारी ने जांच की। पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से मृतक की पत्नी सहित 17 गवाह पेश किए गए। मामला काफी पुराना हो जाने से कुछ अभिलेख उपलब्ध भी नहीं हो पाए।
मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) रामअधार राम ने इस मामले का फैसला सुनाया। घटना में नामजद तत्कालीन अधिशासी अभियंता असलम खां (फतेहगढ़), अवर अभियंता बलराम गुप्ता, मुश्ताक अली (गूलरनाका), सिराज खां (हरदौली) और संतोष कुमार (परशुराम तालाब) को बरी कर दिया। साक्ष्य के अभाव में सभी बरी हो गए। घटना का खुलासा करने वाली महिला फूला देवी और उसके पुत्र को पुलिस ने सरकारी गवाह बना लिया था।