बांदा। डीएम के खिलाफ काफी अरसे से मोर्चा खोले सपाइयों को अंतत: सफलता मिल ही गई। स्वभाव में ‘बोल्ड’ डीएम जीएस नवीन कुमार 13 माह 25 दिन की पारी में ‘आउट’ हो गए। सपा नेताओं का शिकवा था कि डीएम उन्हें ‘लिफ्ट’ नहीं देते। जून माह में बांदा आए मुख्यमंत्री से यह गिले शिकवे सपा नेताओं ने किए थे।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही सपा सरकार ने शीतल वर्मा को हटाकर जीएस नवीन कुमार को 3 अगस्त 2012 को यहां जिलाधिकारी के रूप में तैनात किया था। वह इस जनपद के 72वें डीएम थे। औरैया से तबादले पर आए नवीन कुमार ने शुरू से ही नेताओं को भाव नहीं दिए। शस्त्र लाइसेंस जारी करने में भी उन्होंने जरूरत से ज्यादा सख्त रवैया अपनाया। यहां तक कि अपने इस अड़ियल रवैये के चलते उन्हें शस्त्र लाइसेंस मामले में हाईकोर्ट ने 25000 रुपये जुर्माना तक किया। कई लाइसेंस हाईकोर्ट के आदेश पर डीएम को जारी करना पड़े। सपा नेताओं की सिफारिशों पर भी शस्त्र लाइसेंस न देने की नवीन कुमार ने जैसे ठान लिया था। 19 जून को लैपटॉप बांटने यहां आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उसके कुछ दिनों बाद यहां आए मंत्री शिवपाल यादव से सपा नेताओं ने जीएस नवीन कुमार की जमकर शिकायतें की थीं। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो डीएम के खिलाफ नारे भी लगाए थे। अंतत: विरोध की यह चिंगारी अंदर ही अंदर सुलगती रही। शुक्रवार को शासन ने जीएस नवीन कुमार का तबादला कर दिया। खास बात यह है कि उन्हें कहीं का डीएम नहीं बनाया गया है। बल्कि कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) कार्यालय में संबद्ध किया गया है। नवीन कुमार शनिवार को दोपहर बाद नए डीएम की आमद का इंतजार किए बिना अपना चार्ज सीडीओ को सौंपकर लखनऊ रवाना हो गए। उन्होंने विदाई की माला जैसी रस्म अदायगी भी पसंद नहीं की।
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भूपेंद्र एस चौधरी नए डीएम
बांदा। जनपद के 73वें डीएम के रूप में भूपेंद्र एस चौधरी कमान संभालेंगे। वह आईटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग में विशेष सचिव हैं। इसके पहले वह समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक थे। इसी माह 13 सितंबर को शासन ने उनका तबादला निदेशक से विशेष सचिव पद पर किया था। निदेशालय में भी वह मात्र दो माह के आसपास ही टिके। श्री चौधरी 2008 बैच के आईएएस बताए गए हैं। ब्यूरो