बांदा। बिसरा सुरक्षित रखने की अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही व्यवस्था में अब प्रदेश सरकार ने परिवर्तन कर दिया है। पुलिस लाइन या पोस्टमार्टम हाउस के जर्जर कमरों में अब बिसरा नहीं रखा जाएगा। इसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित थाने की होगी।
पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट न होने पर अक्सर डाक्टर बिसरा (शरीर के महत्वपूर्ण अंग) निकालकर उन्हें एक जार में कुछ केमिकल के साथ सुरक्षित रख देते हैं। यह बिसरा पुलिस लाइन के एक कक्ष में अव्यवस्थित ढंग से रखा रहता है। रख-रखाव के अभाव में यह अक्सर नष्ट हो जाता है। ऐसे में कई बार पुलिस की अदालत में क्लास लगती है। अब शासन ने इस पर संशोधन करते हुए व्यवस्था की है कि पोस्टमार्टम के लिए शव लेकर आए संबंधित थाने के पुलिस कर्मी को ही बिसरा का जार (बर्तन) सौंपा जाएगा। वह इसे थाने ले जाएगा और वहां इसे सुरक्षित रखेगा। जरूरत पड़ने पर थाने से ही बिसरा को विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ भेजा जाएगा। पुलिस लाइन अस्पताल के प्रभारी डा.विष्णु त्रिपाठी ने बताया कि यह नई व्यवस्था पहली जनवरी से लागू हो गई है। अब बिसरा को पुलिस कर्मियों के हवाले किया जाएगा। पुलिस लाइन में नहीं रखा जाएगा।