बांदा। बुंदेलखंड में पाठा क्षेत्र के दुर्दांत दस्यु सरगना रहे ददुआ को लेकर प्रदेश की पुलिस अभी भी एक राय नहीं है। ददुआ के आपराधिक इतिहास और फतेहपुर में उसकी मूर्ति स्थापना को लेकर बांदा, चित्रकूट और फतेहपुर पुलिस अलग-अलग राग अलाप रही है। फतेहपुर की पुलिस ने जहां मंदिर में मूर्ति स्थापित होना स्वीकारा है, तो दूसरी तरफ चित्रकूट पुलिस ने इससे अनभिज्ञता जताई है। फतेहपुर पुलिस ने कहा कि मूर्ति स्थापना की अनुमति नहीं दी गई। उधर, ददुआ के आपराधिक इतिहास को लेकर भी चित्रकूट और बांदा पुलिस परस्पर विरोधी दावे कर रही है। ददुआ के बारे में पुलिस की इस स्थिति का खुलासा जन सूचना अधिकार में पुलिस द्वारा दी गई जानकारियों से हुआ है।
समाजसेवी प्रमोद आजाद (कमासिन, बांदा) ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत दस्यु ददुआ के बारे में उत्तर प्रदेश पुलिस से 13 बिंदुओं पर आधारित जानकारियां मांगी थीं। पुलिस ने यह साधारण जानकारियां देने में अरसा बिता दिया। हाल ही में चित्रकूट, फतेहपुर और बांदा की पुलिस ने सूचनाएं दी हैं। वह भी तब जब मामला राज्य सूचना आयोग और पुलिस महानिदेशक तक पहुंच गया। बांदा जिले की पुलिस ने जो सूचना दी है, उसके मुताबिक जिले के किसी भी थाने में दस्यु ददुआ पर कोई आपराधिक केस दर्ज नहीं था। दी गई सूचना में जिले के सभी थानों द्वारा अलग-अलग दी गई सूचना संलग्न की गई है।
उधर, चित्रकूट पुलिस अधीक्षक कार्यालय के जन सूचना अधिकारी ने हाल ही में राज्य सूचना आयुक्त और प्रमोद आजाद को जो सूचना भेजी है, उसमें ददुआ का आपराधिक इतिहास और मुकदमों की सूची संलग्न की है। कहा कि शिवकुमार उर्फ ददुआ आईएस-112 गैंग लीडर था। उस पर चित्रकूट जिले के विभिन्न थानों में हत्या, लूट, डकैती, अपहरण इत्यादि के 150 केस दर्ज हुए थे। साथ ही चित्रकूट पुलिस ने चित्रकूट जिले के अलावा अन्य जिलों में ददुआ पर दर्ज हुए मुकदमों का भी ब्योरा दिया है। इसमें बांदा के बबेरू थाने में अपराध संख्या-210/81 धारा 396 आईपीसी, बदौसा थाने में अपराध संख्या-88/91 धारा 396, अपराध संख्या-99/81 धारा 147, 148, 149, 342, 323, अपराध संख्या-41/81 धारा 392 व 397 और थाना फतेहगंज में अपराध संख्या-14/89 व अपराध संख्या-22/89 धारा 147, 148, 149, 307 तथा बांदा जीआरपी थाने में अपराध संख्या-61/83 धारा 395, 397 आईपीसी दर्ज है।
ददुआ के आपराधिक इतिहास की दोहरी सूचनाएं
बांदा। दस्यु ददुआ के आपराधिक इतिहास को लेकर चित्रकूट पुलिस द्वारा आरटीआई में दी गई सूचना चौंकाने वाली है। जानकारी मांगी गई थी कि ददुआ का बागी जीवन कब से शुरू हुआ? चित्रकूट पुलिस ने कहा है कि पहला अपराध वर्ष 1983 में पंजीकृत है, जबकि चित्रकूट पुलिस द्वारा इसी पत्र के साथ संलग्न किए गए ददुआ के मुकदमों की सूची में पहला अपराध संख्या-18/76 धारा 325 व 324 आईपीसी कर्वी कोतवाली में दर्ज हुआ था। यानी ददुआ की पहली रिपोर्ट 1976 में दर्ज हुई थी।
बिना अनुमति लगाई मूर्ति
बांदा। आरटीआई में दी गई जानकारी में फतेहपुर जिले के धाता थाना पुलिस ने कहा है कि उसके थाना क्षेत्र के नरसिंहपुर कबरहा गांव में हनुमान मंदिर के अंदर शिवकुमार उर्फ ददुआ और उसकी पत्नी की मूर्ति लगी है। पुलिस ने कहा है कि मूर्ति स्थापना की अनुमति थाना स्तर से नहीं दी गई है। मूर्ति स्थापना/मंदिर बनने को रोकने की भी थाना स्तर पर कोई जानकारी नहीं है। यह जानकारी धाता थानाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने पिछले माह 18 अप्रैल को दी है। उधर, चित्रकूट अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा दी गई सूचना में कहा है कि ददुआ के मंदिर की कोई जानकारी चित्रकूट जिले पुलिस को नहीं है। न ही यह उनके जनपद से संबंधित है।