बांदा। गरीब सवर्णों को नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण के केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसले पर विपक्षी दलों ने जहां चुनावी शिगूफा बताया है, वहीं सत्तारूढ़ दल भाजपा सरकार के इस कदम को खुले दिल से सराह रहा है। दूसरी तरफ बेरोजगार शिक्षित युवक भी पालों में बंटे हुए हैं। सवर्ण वर्ग ने इसे देर से लिया गया सही फैसला बताया है। पिछड़ा वर्ग के शिक्षित बेरोजगार ने इसे गरीब सवर्णों से छलावा कहा है।
भाजपा जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार का यह अच्छा फैसला है। सवर्णों में भी गरीब परिवार है। उनमें भी तमाम के पास अपना मकान नहीं है। शिक्षित होने के बाद भी नौकरी नहीं पा रहे। अब ऐसे गरीब सवर्णों को सरकारी सेवा का मौका मिलेगा।
सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी की नजर में केंद्रीय कैबिनेट का फैसला महज जुमलेबाजी और चुनावी शिगूफा है। भाजपा सरकार को गरीब सवर्णों की याद साढ़े चार साल बाद तब आई है जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। सवर्ण गरीब इस चुनावी हथकंडे से नहीं बहकेंगे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अखिलेश शुक्ला के मुताबिक गरीब सवर्णों को आरक्षण का फैसला भाजपा सरकार की अपनी नाकामियों को छिपाना और सवर्ण गरीबों को लालीपाप देना है। यह निर्णय संविधान की सीमा से बाहर ले जाकर लिया गया है। साढ़े चार साल केंद्र सरकार क्यूं चुप्पी साधे रही।
बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर गयाचरन दिनकर ने कहा कि बसपा पहले से ही गरीब सवर्णों को नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण की मांग कर रही थी, लेकिन यह भाजपा का चुनावी कदम और लालीपाप है। यदि भाजपा सरकार वाकई गंभीर है तो इसे लोकसभा व विधान सभा में पास कराएं।
सवर्ण वर्ग के शिक्षित (बीएससी/बीएड) बेरोजगार सुधीर कुमार गुप्ता (अतर्रा) के मुताबिक सरकार द्वारा गरीब सवर्णों को नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण ने यह साबित कर दिया कि गरीब सवर्ण भी हकदार हैं। आरक्षण जाति आधारित नहीं होना चाहिए। हर जरूरतमंद को लाभ मिलना चाहिए।
पिछड़े वर्ग के शिक्षित (एमए/बीएड) बेरोजगार दिनेश कुमार (जरोहरा) का कहना है कि अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लिउ आरक्षण लागू होने के बाद भी सरकार उनको नौकरी नहीं दे पा रही। अब यह धोखा सवर्ण गरीबों के साथ होगा। यह सिर्फ चुनाव को देखकर लिया निर्णय है।