मटाैंध (बांदा)। बदहाली में दिल का दौरा पड़ने से एक और किसान की जान चली गई। उस पर बैंक व गांववालों का कर्ज था। तीन साल से फसलों पर मौसम की मार झेल रहा था। फसल की आस में सोमवार को खेत पर पहुंचा तो खेत को जुताई लायक न देख उसे वहीं दिल का दौरा पड़ गया और कुछ ही देर में प्राण पखेरू उड़ गए।
कसबा मटौंध के अमर सिंह (58) चार बीघा के काश्तकार थे। उन्होंने कुछ दिन पहले इलाहाबाद बैंक की मटौंध शाखा से 85 हजार रुपये कर्ज लिया था। परिजनों के मुताबिक गांव वालों का 50 हजार रुपये कर्ज था। इकलौते पुत्र अतुल सिंह ने बताया कि पैसे के अभाव में उसके पिता उसकी शादी भी नहीं कर पा रहे थे।
इसका भी उन्हें सदमा था। दैवीय आपदाओं के चलते पिछले तीन साल से खेत मेें फसल नहीं हो पाई। इससे बैंक और गांव वालों का कर्ज अदा नहीं हो पाया। अमर सिंह को यह चिंता खाए जा रही थी। पुत्र ने बताया कि सोमवार दोपहर अमर सिंह अपने खेत की हालत देखने गए थे, ताकि जुताई की तैयारी की जा सके लेकिन अब तक यहां पर्याप्त बारिश न होने से खेत जुताई के काबिल नहीं था।
चौथे साल भी फसल जाती देख अमर सिंह को खेत में ही दिल का दौरा पड़ गया। वह खेत की मेड़ पर गिरे और दम निकल गया। चरवाहों की सूचना पर पुत्र और परिजन तत्काल पहुंचे और शव उठाकर लाए। बिना पोस्टमार्टम आदि के अंतिम संस्कार कर दिया।
इस बाबत मटौंध स्थित इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधक विशाल ने बताया कि अमर सिंह के कर्ज के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। कर्जमाफी की बाबत कहा कि ऐसे किसानों की लंबी लिस्ट है। अभी अंतिम सूची तैयार नहीं हो पाई है। उन्होेंने कहा कि कर्ज है तो मृतक का पुत्र कार्ड आदि लेकर उनसे संपर्क करे। दायरे में आएगा तो कर्ज जरूर माफ होगा।
-तीन साल से बर्बाद हो रही थी फसल, बैंक व गांववालों का था कर्ज
-खेत की हालत जुताई लायक न देख वहीं पड़ गया दिल का दौरा
अमर उजाला ब्यूरो