बांदा। प्यार के हफ्ते की शुरुआत हो गई, जो 14 फरवरी (वेलेंटाइन-डे) तक यह चलेगा। बृहस्पतिवार को पहला दिन ‘रोज-डे’ था। आमतौर पर इसे सिर्फ कपल्स (प्रेमी-प्रेमिका) ही सेलिब्रेट करते हैं, लेकिन लव विद फैमिली यानी परिवार के साथ प्रेम करने की प्रेरणा भी इस विशेष सप्ताह में मिलती है। प्यार का रुहानी एहसास अपने घर-परिवार से लेकर हर इंसान और कुदरत के हर तोहफे से होना चाहिए।
एसीडी स्टूडियो की निर्देशक रश्मी गुप्ता निशा का कहना है कि प्रेम को सीमा में नहीं बांधा जा सकता। प्यार की शुरुआत तो सबसे पहले खुद से करना चाहिए। जब खुद से प्यार नहीं होगा तो दूसरों से साझा कैसे करेंगे? निशा कहतीं हैं कि पति और बेटियों से वह सबसे ज्यादा प्यार करती हैं।
समाजसेवी रजनी गुप्ता ने कहा कि रोज-डे पर किसी को गुलाब का फूल देकर उसे खुश करना फूहड़ता नहीं हो सकता। रेड रोज को प्यार का प्रतीक माना जाता है। प्यार हरेक से करना चाहिए। महिला डिग्री कालेज की प्रवक्ता डॉ. सबीहा रहमानी की नजर में प्रेम शब्द को किसी सीमित दायरे में नहीं देखा जा सकता। हरेक इंसान को पूरी कायनात (सृष्टि) से प्रेम होना चाहिए। वेलेंटाइन-डे को प्यार के पवित्र दिवस के रूप में मनाने में कोई हर्ज नहीं।