बांदा।
हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार लाउडस्पीकर तथा ध्वनि उत्पन्न करने वाले अन्य यंत्रों पर लगाई जा रही लगाम के तहत जिले के उन धार्मिक स्थलों की सूची तैयार की जा रही है, जहां लाउडस्पीकर का इस्तेमाल होता है। बिना अनुमति के अब किसी भी स्थल या आयोजन में लाउडस्पीकर, डीजे अथवा ध्वनि पैदा करने वाले यंत्रों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
जिला प्रशासन ने अब तक 137 धार्मिक स्थल और 89 डीजे चिह्नित किए हैं।
चार जनवरी को प्रदेश सरकार के गृह प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने सभी डीएम और एसपी को जारी शासनादेश में हाईकोर्ट लखनऊ के आदेशों का हवाला देकर कहा था कि ऐसे सभी धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों को चिह्नित करें, जहां स्थायी रूप से लाउडस्पीकर या किसी प्रकार के ध्वनि प्रसारक यंत्र का इस्तेमाल होता है।
इसके लिए राजस्व और पुलिस विभाग की टीम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। 10 जनवरी तक इन स्थानों को चिह्नित किया जाना था। 15 जनवरी के पूर्व अनुमति प्राप्त करने के लिए संलग्न प्रारूप पर अर्जी दी जानी है।
15 के बाद अनुमति प्राप्त किए बगैर धार्मिक अथवा सार्वजनिक स्थलों पर इस्तेमाल हो रहे लाउडस्पीकर या किसी भी ध्वनि प्रसारक यंत्र को उतरवाने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश/प्रतिबंध जुलूस और बारातों आदि में प्रयोग होने वाले ध्वनि प्रसारक यंत्रों पर भी लागू होगा।
गृह सचिव ने शासनादेश में कहा है कि निर्धारित प्रारूप पर सूचनाएं 22 जनवरी तक शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि हाईकोर्ट में अनुपालन आख्या समय से पेश की जा सके। उधर, प्रशासन और पुलिस शासनादेश के तहत कार्रवाई में जुट गई है। अब तक पूरे जिले लाउडस्पीकर इस्तेमाल होने वाले 137 धार्मिक स्थल और 89 डीजे चिह्नित किए गए हैं।
एडीएम गंगाराम गुप्ता ने बताया कि अन्य स्थलों की सूची बनाई जा रही है। लाउडस्पीकर की अनुमति के लिए बांदा शहर से 40 आवेदन प्राप्त हुए हैं। ये मस्जिदों के हैं। बताया कि 15 के बाद अनुमति न लेने वालों पर कार्रवाई होगी।
उधर, अपर पुलिस अधीक्षक लालभरत कुमार पाल ने बताया कि इस बारे में प्रशासन की ओर से अभी कोई सहयोग आदि का पत्र नहीं मिला है। न ही शासनादेश आया है।
उल्लंघन में पांच साल कैद या एक लाख जुर्माना
बांदा। शासनादेश के तहत लाउडस्पीकर अथवा ध्वनि प्रसारक यंत्रों का इस्तेमाल बिना अनुमति किया जाना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण नियम) 2000 के तहत दंडनीय अपराध है।
इसमें 5 वर्ष की सजा या एक लाख रुपये जुर्माना तथा पांच हजार रुपये प्रतिदिन जुर्माना किया जा सकता है। अनुमति का समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक होगा। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी ध्वनि प्रदूषण की अनुमति नहीं होगी।