बांदा। आत्महत्या किसी भी समस्या का विकल्प नहीं है। गाय को अन्ना छोड़ना भी गलत है। एक देशी गाय से 60 बीघे की खेती हो सकती है।
कुछ
गांवों में मॉडल फार्म बनाकर इसकी शुरुआत की गई है। यह जानकारी आर्ट आफ
लिविंग की प्रशिक्षक नीता ओमर, कल्पना पटेल और डॉ. विमलेश राठौर ने दी।
रविवार
को डीएम आवास पर मीडिया से बातचीत में इन प्रशिक्षकों ने कहा कि योगी वही
जो समाज के लिए उपयोगी हो। बुंदेलखंड में किसानों की आत्महत्या पर चिंता
जताते हुए कहा कि यह विकल्प नहीं है।
हालात से हार नहीं माननी
चाहिए। खुदकुशी जैसे घातक कदम से परिवार की स्थिति और खराब होती है। डॉ.
विमलेश ने तनाव दूर करने वाली सुदर्शन क्रिया बताई।
पॉलिथीन का प्रयोग न
करने का आह्वान किया। बंगलूरू से ट्रेनिंग लेकर लौटीं नीता और कल्पना को
माला पहनाकर डॉ. विमलेश ने स्वागत किया।
बंगलूरू स्थित नेशनल
ट्रेनिंग सेंटर के कोआर्डिनेटर बालकृष्ण ने कहा कि एक देशी गाय से 60 बीघे
तक की खेती हो सकती है। उन्होंने बताया कि बांदा में ब्योंजा और तिंदवारी
के टोलिया गांव में गाय पालने के लिए प्रेरित किया गया है।
यहां
मॉडल फार्म बनाकर गायों की उपयोगिता की ट्रेनिंग दी जाएगी। गाय के गोबर और
मूत्र से जीवामृत और धन जीवामृत बनाने का प्रशिक्षण मिलेगा। उन्होंने कहा
कि डीएपी और यूरिया से खेत के पोषक तत्व नष्ट हो रहे हैं।
उधर, डॉ.
विमलेश ने बताया कि 11 से 13 मार्च तक दिल्ली में वैश्विक अभियान आर्ट आफ
लिविंग का आयोजन होगा। इसमें 155 देशों के लोग शामिल होंगे। इस दौरान
दीपेंद्र मिश्रा, अरुण नारायण, राज कुमार सिंह, दीप्ति, मानसी मिश्रा,
सफलता सिंह भी मौजूद रहे।