बांदा। बाढ़ पीड़ितों के लिए आए 8 करोड़ रुपये खाते के अड़ंगे में सरकारी खजाने में ही पड़े हैं। 6 माह बाद भी राजस्व विभाग इनको बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंचा सका। इन्हें 31 मार्च तक नहीं बांटा गया तो शासन को यह सहायता राशि लौटानी होगी। छह माह में राजस्व विभाग मात्र 1.26 करोड़ रुपये ही बांट पाया है। अब वित्तीय वर्ष के अंतिम 13 दिनों में 6.74 करोड़ रुपये बांटना टेढ़ी खीर होगा।
सितंबर में आई केन और यमुना की बाढ़ से जिले की दो तहसीलों पैलानी व बबेरू में 21,788 लघु, सीमांत व वृहद किसानों की 44 हजार हेक्टेअर से अधिक खरीफ की फसल नष्ट हो गई थी। शासन ने फरवरी में 8 करोड़ रुपये कृषि अनुदान जारी किया था। अभी तक दोनों तहसीलों में महज 5541 किसानों को 1.26 करोड़ रुपये ही बांटा गया है।
राजस्व विभाग को महज वित्तीय वर्ष के 13 दिन में 16,247 किसानों को करीब सात करोड़ कृषि अनुदान वितरण किया जाना है। वितरण न होने की स्थिति में वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर 31 मार्च को यह अनुदान शासन को लौटाना/सरेंडर करना पड़ेगा। अनुदान वितरण में मुख्य रोड़ा बाढ़ प्रभावितों के खातों का राजस्व विभाग तक संकलन न हो पाना बताया जा रहा है। यह काम लेखपालों को करना है।
बाढ़ राहत अनुदान अधिकतम दो हेक्टेअर तक के नुकसान पर दिया जा रहा है। एक हेक्टेअर के किसान को 6800 रुपये व दो हेक्टेअर के किसान को 13,500 और न्यूनतम जोत वाले किसान को एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
दैवी आपदा प्रभारी/एडीएम संतोष बहादुर ने बताया कि पैलानी तहसील में अब तक दो हेक्टेअर से कम वाले 2212 व इससे अधिक जोत वाले 580 किसानों को और बबेरू में दो हेक्टेअर से कम वाले 1471 व इससे अधिक जोत वाले 387 किसानों को सहायता राशि दी जा चुकी है। तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि 28 मार्च तक शत-प्रतिशत सहायता राशि का वितरण करें।