बांदा। शहर की दो लाख की आबादी से प्रतिदिन निकलने वाला 55 टन गीला और सूखा कचरा न तो सही ढंग से एकत्रित हो रहा है और न ही उसका उचित निस्तारण। निस्तारण के नाम पर सड़कों के किनारे कचरे में आग लगा दी जाती है, जो कई दिनों तक सुलगता रहता है। इससे न केवल वातावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों को भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चिंताजनक बात यह है कि कचरा प्रबंधन के लिए करोड़ों की लागत से बना सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भी अभी तक काम शुरू नहीं कर सका है, और एक सफेद हाथी साबित हो रहा है।
वर्ष 2021 में बांदा शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर गंछा सड़क पर 10 करोड़ रुपये की लागत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्वीकृति मिली थी। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस महोबा ने वर्ष 2023 में इस भवन का निर्माण पूरा कर नगर पालिका को सौंप दिया। हालांकि, दो साल बीत जाने के बाद भी प्लांट में कचरा निस्तारण के लिए आवश्यक मशीनें स्थापित नहीं की जा सकी हैं। खाली पड़े परिसर में नगर पालिका के सीवर टैंक खड़े दिखाई देते हैं, जो इस प्लांट की उपेक्षा को दर्शाता है।
शहर की दो लाख की आबादी है। 31 वार्ड और 56 मोहल्लों से प्रतिदिन लगभग 55 टन गीला और सूखा कचरा निकलता है। इस कचरे को एकत्रित करने के बाद नगर पालिका की गाड़ियां इसे हाईवे के किनारे फेंक देती हैं। कचरा उड़कर इधर-उधर न फैले, इसके लिए कर्मचारी उसमें आग लगा देते हैं। गीले कचरे के कारण यह आग कई दिनों तक सुलगती रहती है, जिससे निकलने वाला धुआं आसपास के लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कभी-कभी तो कचरे की गंध से दम घुटने लगता है। आर्थिक नुकसान और संभावित आय स्वच्छ भारत मिशन के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इंजीनियर रामशरण ने बताया कि शहर से प्रतिदिन निकलने वाले 55 टन कचरे में लगभग एक हजार रुपये प्रति टन की प्लास्टिक और दो हजार रुपये प्रति टन की जैविक खाद तैयार होने की संभावना है।
इस हिसाब से, 50 टन कचरे से प्रतिदिन 50 हजार रुपये की प्लास्टिक और एक लाख रुपये की जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे न केवल नगर पालिका को आर्थिक लाभ होगा, बल्कि कचरे का प्रभावी प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा।
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनकर तैयार है। प्लांट में करीब 10 करोड़ की मशीनें लगना है। मशीनों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द प्लांट में कूड़े के निस्तारण का काम शुरू होगा।
अभिषेक खरे, जिला प्रबंधक स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)
फोटो- 14 करिया नाला के पास सड़क किनारे पड़ा कचरा। संवाद