बांदा। मानसूनी मौसम से पहले ही कृषि और भूमि संरक्षण विभाग ने बारिश के पानी को संरक्षित करने की कवायदों पर फिर काम शुरू कर दिया है। खेत-तालाब योजना के तहत किसानों के खेतों में चालू वर्ष 2019-20 में 678 तालाब खोदने की तैयारी है। इनकी खुदाई मशीनों से होगी। कुल लागत का किसानों को आधा खर्च देना होगा। आधा पैसा अनुदान के रूप में सरकार तीन किश्तों में देगी।
डीएम हीरालाल ने बताया कि अब खेत और पेट के पानी के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। किसानों को अपने खेत का पानी खेत में ही संरक्षित करने के लिए तालाब खुदवाने को प्रेरित किया जा रहा है। खेत तालाब योजना के तहत पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को अपने खेतों में आधी कीमत पर तालाब खुदवाने की सलाह दी जा रही है।
भूमि संरक्षण अधिकारी के हवाले से बताया कि इस वित्तीय वर्ष 2019-20 में बांदा जिले में 678 तालाब खोदे जाने हैं। इनमें बरसात का पानी संरक्षित किया जाएगा। मशीनों से खुदाई होगी। मिट्टी को तालाब के किनारे बंधी के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। तालाबों की अनुमानित लागत का आधा पैसा किसान को खुद खर्च करना होगा। शेष आधा पैसा अनुदान के रूप में तीन किस्तों में सरकार की ओर से दिया जाएगा।
35 मीटर लंबे, 30 मीटर चौथे और तीन मीटर गहरे तालाब में पक्का इनलेट बनाया जाएगा। इसके लिए किसान को 1,14,200 रुपये खर्च करने होंगे। इसी तरह 22 मीटर लंबे, 20 मीटर चौड़े और तीन मीटर गहरे तालाब में 52,500 रुपये खर्च करना होंगे। खेत की सिंचाई के लिए कृषि विभाग प्रत्येक तालाब के अनुसार लगभग 70 हजार रुपये का स्प्रिंकलर सिस्टम भी देगा। इसमें छोटे किसानों को कीमत का 10 फीसदी और बड़े किसानों को स्प्रिंकलर सेट की कीमत का 20 फीसदी खर्च करना होगा। अब तब बांदा जिले में 1255 तालाब खोदे जा चुके हैं।
पुराने जमाने में खेत को तालाब से और इंसान को कुएं से पानी मिलता था। अब कुएं और तालाब सूख गए। जब से इन्होंने हमारा साथ छोड़ा तब से पानी का विकट संकट आ खड़ा हुआ है। जल ही जीवन है। जल है तो कल है। वर्तमान जीवन और भविष्य को सुरक्षित करना है तो तालाब और कुएं को जीवित करके उन्हें अपना दोस्त और जीवन साथी बनाना होगा। यह दोनों हमारे लिए पूज्य हैं। सामूहिक श्रमदान और पुरानी रीतिरिवाज के मुताबिक आपसी सहयोग से तालाब-कुओं को पुनर्जीवित करें। भीषण गर्मी और गंभीर जल संकट इसके भयावह परिणाम के संकेत दे रहे हैं। -हीरालाल, जिलाधिकारी, बांदा