बांदा। माफियाओं के मकड़जाल में फंसी बालू के दाम आसमान छू रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की हैसियत से बाहर हो गई है। बारिश में जर्जर मकानों की मरम्मत या जल निकासी के जुगाड़ के लिए आम लोगों को बालू के दाम 20 गुना ज्यादा अदा करने पड़ रहे हैं। 150 रुपये मात्र प्रति घन मीटर सरकारी रॉयल्टी की बालू मंडल मुख्यालय में 3000 रुपये प्रति घन मीटर बिक रही है। एक ट्राली (3 घन मीटर) की रॉयल्टी 450 रुपये है। लेकिन आम आदमी को यह ट्राली 9000 रुपये में बेची जा रही है।
बालू को सोने के भाव पहुंचाने में माफिया और खनिज विभाग दोनों की ही भागीदारी है। 150 रुपये रॉयल्टी वाली बालू खनिज विभाग ने ठेकेदारों को 800 रुपये प्रति घन मीटर में बेची। ठेकेदारों द्वारा इसमें साढ़े तीन गुना का और इजाफा करके 3000 रुपये में बेचा जा रहा है।
खुलेआम चल रही इस कालाबाजारी पर प्रशासन रोक लगा पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। बालू पूरी तरह कुदरत की देन है। हर साल यह नदियों में बहकर आती है। इसमें सरकार या किसी कारोबारी की कोई पूंजी नहीं लगती। इसके बावजूद इस प्रकृति संपदा को बालू माफिया, खनिज विभाग, प्रशासन व पुलिस की तिकड़ी की सांठगांठ से सोने के भाव बेचा जा रहा है।
बालू की रॉयल्टी दर अभी भी प्रदेश सरकार द्वारा 150 रुपये प्रति घन मीटर निर्धारित है। मौजूदा राज्य सरकार द्वारा जून माह में ई-टेंडर के जरिए खदानें पट्टे पर उठाए जाने के दौरान निर्धारित रॉयल्टी से छह गुना तक ज्यादा में नीलाम हुईं। कुल 8 खदानें ई-टेंडर से दी गई हैं।
हटेटी पुरवा भाग-एक 715 रुपये प्रति घन मीटर (पौने 5 गुना अधिक), हटेटी पुरवा भाग-दो 601 रुपये (4 गुना अधिक), खप्टिहा 759 रुपये (5 गुना अधिक), सिंधनकलां 911 रुपये (6 गुना अधिक), कुल्लूखेड़ा 401 रुपये (2.67 गुना अधिक), चंदौर 818 रुपये (5.45 गुना अधिक) और लमेहटा खदान 806 रुपये (5 गुना अधिक) प्रति घन मीटर में दी गई है।
-रॉयल्टी से 20 गुना अधिक दामों पर खुलेआम बिक्री
-माफियाओं के मकड़जाल में बालू के भाव सोना हुए
-खनिज विभाग की जुगलबंदी से बालू रिकार्ड महंगी
अमर उजाला ब्यूरो