बांदा। ‘अमर उजाला’ की खबरों को गंभीरता से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा यहां खनन मामले में अपनाए गए सख्त तेवर और खदानों में छापे, धरपकड़ तथा एफआईआर के आदेशों के बाद फिलहाल माफिया और खदान पट्टेधारक सहमे हुए हैं। शनिवार पहली जुलाई को खदानों में खनन बंद हो गया। दो माह पूर्व ई-टेंडर से दिए गए पट्टों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली जुलाई से 9 सितंबर तक खनन न करने के आदेश दिए हैं।
जिले में आठ खदानों के ई-टेंडर पट्टे हुए हैं। लेकिन चालू सिर्फ चार हैं। एनजीटी और हाईकोर्ट की रोक के बाद भी खदानों में मशीनों का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। अवैध खनन भी खूब हुआ।
ग्रामीणाें और खदान संचालकों के बीच गोलीबारी की नौबत आई थी। यह खबर 25 व 28 जून को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से छापीं। इस पर 28 जून को ही प्रदेश के अपर सचिव राज प्रताप सिंह ने बांदा डीएम को पत्र भेजकर इस स्थिति पर मुख्यमंत्री द्वारा अप्रसन्नता व्यक्त करने की बात कही।
साथ ही अवैध खनन पर की गई कार्रवाई की उसी दिन रिपोर्ट मांगी। अपर मुख्य सचिव ने अपने इस पत्र के साथ ‘अमर उजाला’ अखबार के खबरों की फोटो प्रतियां भी लगाईं। इस पत्र के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा और ताबड़तोड़ खदानों में छापे मारकर जेसीबी व अन्य मशीन बरामद कर 22 लोगों की एफआईआर की गई।
शनिवार (पहली जुलाई) को खदानों में खनन नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के तेवरों का खौफ साफ नजर आया। हालांकि मौका और ढिलाई मिलने पर माफिया व पट्टेधारक अवैध खनन या डंप का खेल कर सकते हैं।
-हाईकोर्ट ने पहली जुलाई से 9 सितंबर तक लगाई है रोक
अमर उजाला ब्यूरो