बांदा। मंडी शुल्क में 0.5 फीसदी की कमी करने के प्रदेश सरकार के फैसले से चित्रकूटधाम मंडल के व्यापारियों व किसानों को करीब 50 लाख रुपये सालाना की राहत मिलेगी। लेकिन किसान और व्यापारी इस कमी को ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा बता रहे हैं।
उनकी मांग मंडी शुल्क पूरी तरह खत्म करने की है। मंडल की मंडियों में मंडी शुल्क के रूप में 90 करोड़ रुपये सालाना राजस्व आता है। इसमें 2 फीसदी मंडी शुल्क और 0.5 फीसदी विकास शुल्क (सेस) शामिल है। अब मंडी शुल्क दो फीसदी से घटाकर 1.5 फीसदी किया जा रहा है। मंडी परिसर के बाहर व्यापार करने वाले व्यापारियों पर मंडी शुल्क पहले ही समाप्त किया जा चुका है।
गल्ला व्यापार मंडल कार्यवाहक अध्यक्ष विष्णु कुमार गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूरा मंडी शुल्क माफ करने की बात कही थी। प्रदेश सरकार इस पर अमल नहीं कर रही। 0.5 फीसदी मंडी शुल्क घटाने से व्यापारी और किसानों का कोई हित नहीं होगा।
गल्ला व्यापारी उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि मंडी शुल्क में 0.5 प्रतिशत की कमी से वह संतुष्ट नहीं हैं। इनका कहना है कि सरकार को किसानों को राहत देना ही है तो वह पूरा मंडी शुल्क माफ करे। सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करें और शुल्क माफ करे।
गल्ला व्यापारी रामऔतार गुप्ता का कहना है कि मंडी के बाहर व्यापार करने वाले व्यापारियों पर मंडी शुल्क समाप्त कर दिया गया है। मंडी परिसर के व्यापारियों का भी मंडी शुल्क माफ हो, जिससे व्यापारियों के साथ-साथ किसानों को भी राहत मिल सके।
गल्ला व्यापारी कृष्ण प्रकाश गुप्ता ने बताया कि 0.5 फीसदी मंडी शुल्क की कमी से व्यापारियों और किसानों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमारी मांग पूरा मंडी शुल्क समाप्त किए जाने की थी। इस पर अभी तक प्रदेश सरकार ने गंभीरता से विचार नहीं किया है।
मंडी और विकास शुल्क से ही मंडी के विकास कार्य और वेतन का खर्च होता है। मंडी के बाहर व्यापार करने वाले व्यापारियों का पहले ही मंडी शुल्क समाप्त किया जा चुका है। यह शासन का फैसला है। इसमें हम क्या कर सकते हैं?-विभा खरे, सचिव, कृषि उत्पादन मंडी समिति, बांदा।