खेरवा गांव में उपवास सत्याग्रह करते घुमंतू।
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बांदा। लॉकडाउन में कारोबार बंद हो जाने से भुखमरी की कगार पर पहुंचे घुमंतू परिवारों ने बुधवार को सत्याग्रह शुरू कर दिया। ये हाथों में खाली थाली लिए हुए हैं। इनका कहना है कि उन्हें किसी तरह की आर्थिक या राशन आदि की मदद नहीं मिली। सत्याग्रही कुचबंधियों ने बैनर में लिखा है- हुजूर भूख से मर रहे हैं, इसलिए उपवास करके परिवार सहित जीवन का अंत कर रहे हैं। ईश्वर जिम्मेदारों को सद्बुद्धि दे।
नरैनी तहसील के अंतर्गत खेरवा गांव में घुमंतू कुचबंधिया परिवार आबाद है। यह गांव-गांव घूमकर स्वनिर्मित सामान बेचकर अपना भरण पोषण करते हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद इनका धंधा बंद हो चुका है। कुल 47 परिवारों में 17 परिवारों के पास राशन कार्ड भी नहीं हैं।
उन्हें कोटे से भी कुछ राशन नहीं मिल रहा। ऑनलाइन आवेदन के बाद भी कार्ड नहीं बने। कई दिनों से आर्थिक तंगी झेल रहे घुमंतू परिवारों में बाबूलाल, रामसेवक, फूलचंद्र, छोटेलाल, कल्लू, वीरू, नरेश, रेनू, ममता, शिवदेवी, केलारानी, लीलावती, भूरी आदि ने बुधवार से गांव में ही बैनर लगाकर एक साथ उपवास सत्याग्रह शुरू कर दिया है।
उनका कहना है कि अब उन्हें दूसरे गांवों में घुसने भी नहीं दिया जा रहा। उधर, इस बाबत नरैनी एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल उन्हें इस सत्याग्रह उपवास की जानकारी नहीं है। राजस्व कर्मियों को गांव भेजकर वह पूरी स्थिति का पता करवाएंगी।