केन-बेतवा गठजोड़ से प्रभावित हो रहे 10 गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 35 वर्ष पूर्व 1980 में पन्ना नेशनल पार्क के लिए कई गांवों के ग्रामीणों की जमीनें लेकर उन्हें विस्थापित कर दिया गया था। फिर उनकी सुध नहीं ली गई।
अपनी जमीनें गंवाने के बाद वे आज भी परिवारों के साथ इधर-उधर भटक रहे हैं। उन्हेें मुआवजा भी नहीं मिला। झालर (पन्ना) गांव के धनी राम यादव, लोनी बाई, हरीराम यादव, हल्काई यादव ने कहा कि कुटनी बांध के लिए भी तमाम ग्रामीण हटाए गए थे पर मुआवजा नहीं मिला।
ग्रामीण बोले, अब केन-बेतवा लिंक के नाम पर और ग्रामीणों को हटाने की तैयारी है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पन्ना नेशनल पार्क के कर्मचारी इर्द-गिर्द बसे गांवों के लोगों को परेशान कर रहे हैं।