बांदा। एनआरएलएम समूहों को समय से बैंक ऋण न मिल पाना स्वरोजगार की राह में रोड़ा साबित हो रहा है। पिछले पांच माह से दो सौ से अधिक समूहों की पत्रावलियां सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) के लिए संबंधित बैंकों में लंबित हैं।
एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) कार्यक्रम के तहत गांवों की गरीब महिलाओं को स्वरोजगार देकर स्वावलंबी बनाना है। बुंदेलखंड में वर्ष 2013 से क्रियान्वयन शुरू हुआ। अब तक कृषि क्षेत्र के साथ मुर्गी पालन, स्कूली यूनिफार्म जैसे कार्यो से समूह की ज्यादातर महिलाएं जुड़ चुकी हैं। रोजगार परक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए समूहों को सीसीएल किया जाता है।
गठन के बाद आर्थिक सहायता के रूप में समूहों को पहले आरएफ (रिवाल्विंग फंड) इसके बाद सीआईएफ (सामुदायिक निवेश निधि) दी जाती है। फिर सीसीएल से बैंकों द्वारा ऋण दिया जाता है। विभाग के मुताबिक जिले में अब तक 682 समूह सीसीएल हो चुके है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2018-19 की 200 से अधिक पत्रावलियां लगभग पांच माह से बैंकों में लंबित हैं। जिला मिशन प्रबंधक राकेश सोनकर ने बताया कि इनमें 146 पत्रावली इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, 50 इलाहाबाद बैंक और 19 अन्य बैंकों में लंबित हैं।
जिला मिशन प्रबंधक ने बताया कि समूहों के लिए सीसीएल के तहत अब ऋण सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई है। पहले 50 हजार तक सीसीएल में ऋण का प्रावधान था। इसे एक साल में अदा करने के बाद ऋण की सीमा एक लाख रुपये की जाती थी, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में सीसीएल की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई है। पांच सालों के लिए स्वीकृत होने वाले इस ऋण में प्रतिवर्ष एक-एक लाख रुपये दिये जाते हैं।