बांदा। रेलवे लाइनों के इर्द-गिर्द की भूमि को अब मनरेगा से भी हरा-भरा किया जाएगा। रेलवे क्रासिंग, पहुंच मार्ग आदि में भी मनरेगा से पौधरोपण और अन्य कार्य कराए जाएंगे। रेलवे ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है। इसके पीछे सरकार की मंशा ग्रामीणों को रोजगार के अवसर बढ़ाना है। बुंदेलखंड के सात जिलों में 10 लाख से अधिक मनरेगा जाब कार्डधारक श्रमिक हैं।
अभी तक ग्राम पंचायतों में तालाब की खुदाई, मेड़बंदी, पौधरोपण आदि कार्य मनरेगा मजदूरों से कराए जा रहे हैं, लेकिन कई ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं, जहां मनरेगा के कोई कार्य नहीं चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में गांवों से बड़ी संख्या में मजदूर महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। अब मनरेगा में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। श्रमिकों को रेलवे के कार्यों में भी काम करने का मौका मिलेगा।
मनरेगा जाब कार्ड धारक श्रमिक रेलवे स्टेशन क्रासिंग के पहुंच मार्ग के निर्माण व मरम्मत, ट्रैक के आसपास खाली पड़ी जमीन पर पौधों को रोपित करने के लिए गड्ढे खोदने, जल संरक्षण और मिट्टी डालने का काम करेंगे। इसके लिए रेल मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में ग्राम विकास आयुक्त योगेश कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर कहा है कि वे रेलवे के स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठक कर ग्राम पंचायतवार कामों का चिह्नीकरण करके वार्षिक कार्य योजना तैयार करें।
उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में रेलवे के पास करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि रेल पटरियों के किनारे खाली पड़ी हैं। इसमें पौधरोपण और जल संरक्षण का कार्य किया जाएगा। इसके अलावा एप्रोच मार्ग, स्टेशन को जोड़ने वाली सड़कों में भी मिट्टी का काम मनरेगा श्रमिक करेंगे।
मनरेगा श्रमिकों को जिला व क्षेत्र पंचायत ने काम देना बंद कर दिया है। यहां मनरेगा योजना को खत्म कर दिया गया है। कुछ कार्यदायी संस्थाओं ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब मनरेगा से सिर्फ ग्राम पंचायतों में तालाब खुदाई व शौचालय बनाने के अलावा श्रमिकों के पास कोई काम नहीं है।