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Banda News: मॉडल गांवों की सफाई में खर्च हुए साढ़े 28 करोड़, गंदगी ज्यों की त्यों

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गांव में फैली गंदगी।  - फोटो : संवाद
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बांदा। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत माॅडल गांवों में साढ़े 28 करोड़ से अधिक खर्च कर दिए गए। इसके बाद भी सफाई व्यवस्था धड़ाम है। डोर-टू-डोर कूडा कलेक्शन के लिए खरीदे गए रिक्शा आरआरसी सेंटर में महीनों से खड़े हैं। कूडा कलेक्शन न होने से आरआरसी सेंटर भी शोपीस बने हुए हैं। माॅडल गांवों की गलियों में गंदगी का अंबार है।
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जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2022-23 में 89 ग्राम पंचायतों को माॅडल बनाने के लिए चयनित किया गया था। शासन ने यहां पर नाली निर्माण, कूड़ा कलेक्शन के लिए ई-रिक्शा, आरआरसी सेंटर का निर्माण आदि के लिए 28.51 करोड़ बजट जारी किया था। ग्राम पंचायतों ने बजट को तो ठिकाने लगा दिया, लेकिन ग्राम पंचायतों में न कूड़ा उठ रहा और न ही उसका निस्तारण। कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा आरआरसी सेंटर में खड़े हैं।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि शासन ने ई-रिक्शा संचालकों के मानदेय की कोई व्यवस्था नहीं की है। गांव वाले ई-रिक्शा संचालकों को 50 रुपये महीना भी नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कुछ दिन चलने के बाद ई-रिक्शा बंद हो गए। जब कूडा का उठान ही नहीं हो रहा है तो आरआरसी सेंटर में कूड़े का निस्तारण कहां से होगा।
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