भीगने के बाद गेहूं के बोरों पर डाला गया तिरपाल।
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रेलवे स्टेशन पर दो दिन से रखा 2525 मीट्रिक टन गेहूं बारिश के पानी में भीग गया। गेहूं बांदा से लखनऊ भेजा जा रहा है। रैक न मिलने से स्टेशन पर ही रखा हुआ था। शुक्रवार को रैक मिलने पर भीगा गेहूं ही में लोडकर भिजवा दिया गया। कई बोरों में गेहूं के अंकुर फूट आए हैं।
शासन के निर्देश पर यह गेहूं लखनऊ भेजा जा रहा है। दो दिन पूर्व एफसीआई से इसे उठाकर रेलवे माल गोदाम के प्लेटफार्म पर डंप कर दिया गया। खुले आसमान तले रखा गेहूं बारिश में भीग गया। भीगने के बाद रेल कर्मियों और एफसीआई कर्मियों को सुध आई। आनन-फानन त्रिपाल डालने की औपचारिकता निभाई। भीगे गेहूं में अंकुर फूट आए। शुक्रवार को जैसे ही रैक उपलब्ध हुई ठेकेदारों ने गेहूं को गीला ही ट्रेन में लदवा दिया।
एफसीआई के रैक मैनेजर आयुष्मान शुक्ला का कहना है कि रैक न मिलने से यह स्थिति हुई। यह भी कहा कि गेहूं की सुरक्षा का दायित्व रेलवे का है, लेकिन रेलवे में न तो गोदाम है औैर न ही तिरपाल या पॉलिथीन है। ऐसे में गेहूं की सुरक्षा खुद ठेकेदार करते हैं। मैनेजर के मुताबिक कुछ ही बोरे भीगे हैं। उधर, रेलवे के गोदाम प्रभारी आरपी मिश्रा का कहना है कि गुरुवार को रैक उपलब्ध करा दी गई थी। एफसीआई के पास लोड कराने के लिए मजदूर नहीं थे।