बांदा। महानगरों से लौट रहे मजदूरों को अब उनके गांव से पहले ही रोककर प्रशासन द्वारा बनाए गए 12 क्वारंटीन सेंटरों में रखा जा रहा है। मंगलवार को सातवें दिन भी पैदल व अन्य साधनों से मजदूरों की आमद जारी रही। बीती रात से मंगलवार की शाम तक जिला अस्पताल व मेडिकल कालेज में कुल 1806 मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। इन सभी को विभिन्न क्वारंटीन सेंटरों में भेजा गया है। इन्हें मिलाकर क्वारंटीन सेंटरों में रोके गए मजदूरों की संख्या लगभग ढाई हजार पहुंच गई है।
महानगरों से लौटने वालों के लिए 12 क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। इनमें कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, तिंदवारी, महोखर, जसपुरा व नरैनी समेत जीआईसी बबेरू व मटौंध, फात्मा इंटर कालेज चिल्ला, हिंदू इंटर कालेज अतर्रा, पंडित जेएन इंटर कालेज गिरवां, प्राथमिक विद्यालय पड़ुई, प्राथमिक विद्यालय कुलकुम्हारी और जूनियर विद्यालय त्रिवेणी शामिल हैं। मजदूरों को यहां 14 दिन रखा जाएगा। उसी के बाद सबकुछ ठीक मिला तो घर जाने की अनुमति दी जाएगी। मंगलवार तक इन क्वारंटीन सेंटरों में रोके गए मजदूरों की संख्या लगभग ढाई हजार पहुंच गई। तहसीलदारों को इनके खाने-पीने की व्यवस्था का जिम्मा दिया गया है। एक राजस्वकर्मी और सुरक्षा के लिए दो कांस्टेबल तैनात किए गए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संतोष कुमार ने बताया कि सीएचसी/पीएचसी स्तर पर गठित चिकित्साधिकारियों की टीम क्वारंटीन सेंटर में मजदूरों की जांच कर रही है। फिलहाल किसी में भी कोरोना लक्षण नहीं मिले।
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क्वारंटीन सेंटर भागा, धरा गया
तिंदवारी स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय क्वारंटीन सेंटर से सोमवार की देर रात एक युवक बाउंड्री फांदकर भाग निकला। पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने कुछ ही देर में उसे पकड़ लिया और पुन: क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया। यहां कुल 279 लोगों को रखा गया है।