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जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति ठप, मरीजों की आफत

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बांदा शहर में मेडिकल स्टोर में लगी भीड़। - फोटो : BANDA
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बांदा। लॉकडाउन की बंदिशों ने जीवनरक्षक दवाओं का भी संकट खड़ा कर दिया है। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय में गंभीर मरीजों को जानलेवा मर्जों की दवाएं अब ढूंढें नहीं मिल रहीं। 25 मार्च के बाद दवा की कोई खेप यहां नहीं आई। दवा व्यापारियों के लाखों रुपये के आर्डर रुके हुए हैं। ये स्थिति तब है जबकि शासन ने दवाओं के ट्रांसपोर्टेशन/परिवहन को लॉकडाउन से छूट दे रखने का आदेश जारी कर रखा है।
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बांदा के दवा व्यवसायी बताते हैं कि दवाओं की आवक होली से ही बाधित हो गई थी। होली पर भी वाहन नहीं चलते। कानपुर में 8 दिन होली का असर रहता है। इससे दवाओं का परिवहन काफी हद तक बाधित रहा। अब लॉकडाउन ने परिवहन पर रोक लगा दी है। यहां दवाओं की आपूर्ति लखनऊ और कानपुर से होती है। अधिकांश दवाएं लखनऊ से ही आती हैं। 25 मार्च से कोई वाहन इन दोनों महानगरों से दवा लेकर नहीं आया। यहां के प्रमुख थोक दवा विक्रेताओं का कहना है कि पुलिस वाहन नहीं चलने दे रही है।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष शांतनु ओमर ने बताया कि ट्रांसपोर्ट कंपनियों का कहना है कि उनके वाहनों को अनुमति नहीं मिली। दवा व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। ओमर ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग हुई थी। इसमें वह खुद भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने दवाओं के वाहनों को बाधित न करने के निर्देश दिए थे। उधर, इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि दवा के वाहनों की परमीशन सिटी मजिस्ट्रेट को देनी है। इस बारे में जिलाधिकारी से अनुरोध करेंगे।
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सीएमओ और ड्रग इंसपेक्टर के पाले में डाल दी गेंद
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष ने बताया कि लखनऊ से दवा मंगाने वाली स्थानीय कंपनी ने यहां प्रशासन से वाहन के लिए अनुमति मांगी थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और ड्रग इंसपेक्टर से अनुमोदन लाने की शर्त रख दी है। एसोसिएशन पदाधिकारी भी तीन दिन पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट से मिले थे। तब उन्होंने कोई व्यवस्था का भरोसा दिलाया था।
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