सूखा प्राकृतिक है या लोगों द्वारा पैदा किया गया?
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बांदा। बारिश शुरू होने के बाद सूखे का शोर कम होने लगा है। उधर, वर्ष 2014 में दैवी आपदा के शिकार किसानों में ज्यादातर को अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। प्रदेश सरकार ने कुछ पैसा देकर हाथ खींच लिए। चित्रकूटधाम मंडल के प्रशासन द्वारा मांगी गई मदद राशि में लगभग 25 करोड़ रुपये की कटौती कर ली गई। यह राशि अभी तक नहीं दी गई। शासन ने 72 करोड़ रुपये दिए। इसमेें जिलों के प्रशासन ने करीब छह करोड़ रुपये किसानों तक नहीं पहुंचाए।सूखा राहत अनुदान के बारे में चित्रकूटधाम मंडल प्रशासन द्वारा तैयार की गई ताजा रिपोर्ट मेें चारों जनपदों का अलग-अलग ब्योरा दिया गया है। बांदा जनपद में वर्ष 2014 के सूखे से 2,05,314 लघु एवं सीमांत किसान प्रभावित बताए गए। इनके लिए जिला प्रशासन ने 66 करोड़ 24 लाख 38 हजार रुपये मांगे थे। शासन ने इसमें 19 करोड़ 54 लाख 19 हजार रुपये की कटौती करके सिर्फ 46 करोड़ 70 लाख 19 हजार रुपये ही भेजे। प्रशासनिक दावों के मुताबिक शासन से मिला पूरा पैसा 1,87,316 किसानों को बांट दिया गया। यानी करीब 18 हजार किसान सरकारी मदद से महरूम रह गए। अब इन किसानों की उम्मीद टूटने लगी है।
चित्रकूट जनपद में वर्ष 2014 के सूखा में जनपद के दैवी आपदा और राजस्व विभाग ने सरकार को दी सूचना में बताया है कि शासन से मिले 11 करोड़ 25 लाख 7 हजार 620 में सभी पूरा पैसा 37228 किसानों को बांट दिया गया लेकिन अभी पांच करोड़ 63 लाख 87 हजार 70 रुपये और चाहिए। शासन ने यह अब तक नहीं दिए हैं। हमीरपुर में वर्ष 2014 के सूखे में स्थानीय प्रशासन के 28 करोड़ 10 लाख 20 हजार रुपये शासन से मांगे थे। सरकार ने इसमें 16 करोड़ 10 लाख 83 हजार रुपये दिए। यानी करीब 12 करोड़ रुपये नहीं दिए। उधर, प्रशासन ने भी सरकार की तर्ज पर कंजूसी करते हुए सिर्फ 10 करोड़ 64 लाख 21 हजार रुपये बांटे। पांच करोड़ 46 लाख 62 हजार रुपये अभी भी हमीरपुर प्रशासन दाबे बैठा है। जो भी पैसा बांटा गया है वो सिर्फ सीमांत और लघु किसानों को दिया गया है। इसी तरह महोबा में 9025 किसानों को मात्र पांच करोड़ रुपये बांटे गए हैं। प्रशासन ने इतने ही मांगे थे और सरकार ने इतने ही दे दिए।