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पचनेही की गोशाला में 24 गायों की मौत

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पचनेही की गोशाला में कैद अन्ना गायें। - फोटो : BANDA
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तिंदवारी। कोरोना बचाव तैयारियों में जुटे प्रशासन ने गोशालाओं की गायों से नजरें फेर ली हैं। नतीजे में भूख-प्यास और बीमारी से गोशालाओं में गायों की मौतें हो रही हैं। पचनेही गांव में चालू माह मार्च में दो दर्जन से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है। कई मरणासन्न अवस्था में हैं। कुत्ते उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। एसडीएम का कहना है कि वह कोरोना वायरस कार्यों में व्यस्त हैं। ग्राम प्रधान ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में व्यस्त होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
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पचनेही गांव में ग्राम पंचायत के निर्देशन में गोशाला चल रही है। लगभग दो सैकड़ा गायें हैं। पिछले दिनों बारिश हो जाने से इन पशुओं को पानी की राहत मिल गई थी। यहां चारे-भूसे और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पशु भगवान भरोसे हैं। नतीजे में उनकी मौतों का सिलसिला चल पड़ा है। रोजाना दो-चार गायों की मौत हो रही है।
गोशाला में कई गायों के ऐसे भी शव नजर आए, जिनके कानों पर पशु पालन विभाग का टैग लगा हुआ है। गांव के रामविशाल, शिवशरण, जियालाल, वीरेंद्र कुमार, जीतू, सत्येंद्र, जय देवी आदि ने बताया कि ग्राम प्रधान बांदा शहर में रहते हैं। गोशाला नहीं आते। ग्रामीणों ने बताया कि मवेशियों को न चारा मिलता है, न पानी।
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हफ्ता-दस दिन में कोई कर्मचारी आया तो टंकी में पानी भरकर चला जाता है। गायों के बछड़ों को कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं। रविवार को 13 गायों के शव और 18 गायों के कंकाल पड़े मिले। हालांकि ग्राम प्रधान के लोग शवों को उठाकर जेसीबी से गड्ढा खोदने के बाद दफना देते हैं। कई शवों की सड़ांध से ग्रामीणों को भी मुश्किल हो रही है।
इस बारे में एसडीएम सदर सुरजीत सिंह का कहना था कि कोरोना वायरस के चलते उनकी व्यस्तता ज्यादा है। वह किसी को भेजकर गोशाला की हालत पता करवाएंगे। उधर, ग्राम प्रधान विनय कुमार सिंह ने कहा कि वह बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का काम देख रहे हैं। इसी व्यस्तता से गोशाला में समय नहीं दे पा रहे। व्यवस्थाएं शीघ्र दुरुस्त करा देंगे। गोरक्षा के नाम पर गठित संगठनों के नुमाइंदे भी यहां झांकने नहीं आ रहे।
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