मंडल मुख्यालय बांदा में अलीगंज पुलिस चौकी के सामने नेशनल हाईवे पर रोज लगता है ऐसा ही जाम।
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बांदा। मंडल का तमगा मिले 23 साल बीत गए, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था कस्बों से भी बदतर है। दो दशकों से ज्यादा होने के बावजूद प्रदेश सरकार और खासकर पुलिस महकमा मंडल मुख्यालय बांदा में ट्रैफिक व्यवस्था को मंडल स्तर का नहीं बना सका। 17 लाख से ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुके जिले के मुख्यालय सहित अन्य उप नगर/कस्बे रोजाना बदहाल और अस्त-व्यस्त ट्रैफिक व्यवस्था से जूझ रहे हैं।
यातायात पुलिस ने अब तक यहां अधिकारियों की नियुक्ति ही नहीं कर पाई है। होमगार्डों से यातायात संभाला जा रहा है। सिविल पुलिस कानून व्यवस्था बरकरार रखने के अपने मुख्य काम को छोड़कर ट्रैफिक संभालने में अपनी ऊर्जा और समय गंवा रही है। चित्रकूटधाम मंडल का गठन वर्ष 1997 में हुआ था।
अधिकांश विभागों ने यहां मंडल स्तरीय कार्यालय और अधिकारी तैनात कर दिए, लेकिन यातायात पुलिस पर तवज्जो नहीं दी गई। मुख्यालय सहित जनपद के कस्बों में 50 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े वाहन बढ़ रहे हैं। आबादी भी 18 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। ऐसे में सड़कों पर वाहनों और राहगीरों का दबाव स्वाभाविक है।
यह साल-दर-साल बढ़ रहा है, लेकिन यातायात व्यवस्था जहां की तहां है। आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ल द्वारा मांगी गई सूचना में अपर पुलिस अधीक्षक/प्रभारी यातायात ने बताया कि जनपद में यातायात पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक और उप निरीक्षक के पद स्वीकृत नहीं हैं।
यहां सिविल पुलिस (नागरिक पुलिस) के निरीक्षक और उपनिरीक्षक यातायात का काम भी देख रहे हैं। यह भी बताया कि मुख्य आरक्षी के दो और आरक्षी (यातायात) के 10 पद स्वीकृत हैं। यह भी कहा कि वर्तमान में 15 होमगार्डों से यातायात व्यवस्था की ड्यूटी कराई जा रही है।