बांदा। राज्य कर्मचारी तीन दिन के हड़ताल पर चले गए। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर विकास भवन में दिखाई दिया। रोडवेज, रजिस्ट्रार और अन्य तमाम कार्यालयों में हड़ताल का असर ज्यादा नहीं दिखा। संयुक्त कर्मचारी परिषद के बैनर तले विकास भवन परिसर में हड़ताली कर्मचारियों ने सभा की। प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी और हठधर्मी के आरोप लगाए। पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की।
विकास भवन में सन्नाटा रहा। दूर-दराज से पेंशन आदि की फरियादें लेकर आए लोग कुछ देर इंतजार के बाद लौट गए। अफसरों के ताला बंद कमरों के बाहर पड़ी बेंच में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सोते रहे। मर्दननाका मोहल्ले की सुनीता, खुटला की दयावती, छाबी तालाब की श्याम बाई ने बताया कि सुबह से बैठे हैं। पेंशन नहीं मिल रही है। साहब से मिलना था लेकिन न बाबू हैं और न ही अधिकारी। निर्वाचन कार्यालय, बाल विकास परियोजना कार्यालय, आरईएस, कृषि विभाग, अर्थ एवं संख्या विभाग, लघु सिंचाई, नेडा, मत्स्य और अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में भी सन्नाटा रहा।
उधर, रोडवेज में हड़ताल का असर नहीं रहा। रोजमर्रा की तरह बसें चलती रहीं। इसी तरह उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री बैनामे का काम होता रहा। उधर, हड़ताल के पहले दिन हड़ताली कर्मचारियों ने विकास भवन गेट पर मीटिंग की। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव और महामंत्री आरजे शर्मा ने दावा किया कि आंगनबाड़ी, राजस्व संग्रह अमीन, ग्राम्य विकास अधिकारी संघ, सिंचाई विभाग, नलकूप खंड सहित 22 विभागों में हड़ताल चल रही है।
सभा की अध्यक्षता विकास भवन संघ अध्यक्ष रीता सिंह ने की। गोपी दीक्षित, रामकृष्ण त्रिपाठी, प्रमोद द्विवेदी, शिवकरन तिवारी, राजकरन टैगोर, राजकिशोर पाल, जगतपाल यादव, चंद्रप्रकाश त्रिपाठी, आलोक कुमार, अजय कुमार शर्मा, नर्वदा चतुर्वेदी, महेंद्र द्विवेदी, लालजी सोनकर, किरन सेठी, रजनी मरजीना, नीलम वर्मा, अश्वनी गुप्ता, सुखराम सिंह, भूरा सिंह, बाबूराम मिश्रा, ओपी मिश्रा, जेके नायक, आलोक सिंह, आर चंद्रा आदि शामिल रहे। 11 अगस्त (गुरुवार) को सदर तहसील में मीटिंग होगी।